मस्त विचार 202
मैं जमाने में बदनाम बस इसलिए हूँ,
मुझे लोगों की तरह बदल जाना नहीं आता……!
मुझे लोगों की तरह बदल जाना नहीं आता……!
एक साथ खुलते- बंद होते हैं,
एक साथ रोते हैं, और एक साथ ही सोते हैं.
वो भी जीवन भर एक दूसरे को देखे बगैर …………!
निकलते ही “रिश्तों” का वजन कम कर देते हैं..
मजा ले ले ज़िन्दगी का. खुशियों की तू तलाश न कर.
ग़मों से दूर हो कर, तेरी तक़दीर भी बदल जाएगी.
मुस्कुराना सीख ले, उस की वजह की तलाश न कर.
जैसे अँधेरे में प्रकाश जा के ज्योति की आस जगा दे.
मेरी आँखों को निखरना आ गया.