मस्त विचार 181
हर वक़्त तेरी याद मेरे साथ है.
मन तो करता है कि खुद से ही खुद को चुरा लूँ.
पर कहते हैं चोरी करना बुरी बात है.
हर वक़्त तेरी याद मेरे साथ है.
मन तो करता है कि खुद से ही खुद को चुरा लूँ.
पर कहते हैं चोरी करना बुरी बात है.
यह कभी ठंडी लगे, तो यह कभी गर्म लगे .
तुम अगर बैठ भी जाओ, नजदीक में आकर .
सच में कहूं, सारी दुनिया ही मस्त लगे .
क्या तू सच में जीता .
अच्छा होता कि तू हार जाता .
तू तो जीत कर भी हारा ही है .
दुनिया में जो जीता वह भी हारा .
जो हारा वह तो हारा ही .
तूने क्या पाया ?
क्या करेगा इस जीत का .
किसको दिखायेगा , बताएगा.
खुशियाँ क्या मना पायेगा तू .
केवल बचा है तू और बना है सन्नाटे का बादसाह .
अपनी जीत के साथ अकेला खड़ा है .
तू जीता नहीं , हारा है .
तुझे क्या मिला ?
कोई ना जाने, कोई ना जाने.
आप को हर “वक्त”* पता होता है, आप के पास कितनी “दौलत” है,
लेकिन
आप कितनी भी *”दौलत” खर्च कर के यह नही जान सकते
आप के पास कितना ”वक्त” है !!
…..एक दिन उनके पीछे पूरा काफिला चलता है.