मस्त विचार 175

थोडा – सा सफ़र और तय करना है .

जीवन ख़त्म हो जाए इससे पहले .

सबके लिए कुछ कर जांऊ .

कर्ज है मुझ पर जीवन में .

सफ़र के साथियों का .

काश कुछ मेरे वश में होता .

उतार देता हर एक का क़र्ज़ .

मुझे थोड़ी हिम्मत मिले .

थोडा – सा सफ़र और तय करना है .

मस्त विचार 174

मन भरा – भरा रहता है, आंसू का दरिया – सा बहता है.

दुःख भीतर – भीतर रहता है, मन हर समय कुछ कहता है.

कुछ बात थी जो ख़त्म हो रही है, यादें हैं और विलाप है.

क्या होना था क्या हो गया, मन हर समय ही रो दिया.

कुछ कहने को भी तरशा, हाँ पर बात किससे करूँ.

क्या हुआ कोई भी नहीं कहता,आंसू का दरिया बहता रहता है.

मस्त विचार 172

 अब मुझे पैसे से लिए हुए सामान से ख़ुशी नहीं मिलती,

क्योंकि वो मेरे लिए कोई बड़ी बात नहीं है.

अब मुझे कोई भी वो काम सुख देता है,

जिसे करके मै किसी के लिए उपयोगी हो सकूँ.

error: Content is protected