मस्त विचार 169

  जिन्दगी की हर सुबह कुछ शर्ते लेके आती है.

 
और जिन्दगी की हर शाम कुछ तर्जुबे देके जाती है.

 

मस्त विचार 168

इन्सान ने वक़्त से पूछा……..

मैं हार क्यूँ जाता हूँ ?

वक़्त ने कहा….

धूप हो या छाँव हो,

काली रात हो या बरसात हो,

चाहे कितने भी बुरे हालात हों,

मैं हर वक़्त चलता रहता हूँ,

इसलिए मैं जीत जाता हूँ,

तू भी मेरे साथ चल,

कभी नहीं हारेगा……… ”

मस्त विचार 166

समय और परिस्थिति के अनुकूल बदलना कोई बुरी बात नहीं है,

इससे पहले कि समय आपको बदल दे, खुद बदल जाओ . 

मस्त विचार 165

लोहे की दीवारे पंछी कैसे तुझे सुहाती होंगी ?

अंतर में संघर्ष छिपाए, तेरा जीवन जलता होगा…

हांसो में छिप क्रन्दन तेरा, भोले जग को छलता होगा,

पर अनजाने में तो तेरी अखियाँ भी भर आती होंगी…

लोहे की दीवारे पंछी कैसे तुझे सुहाती होंगी………

जग की खुशियों पर न्योछावर, होगी कब तक तेरी चाहें,

पलको की डोरों से कब तक, नापेगा जीवन की राहें ?

सोच रहा हूँ बुझती कितनी यूँ ही जीवन बाती होंगी………….

जागृति का सन्देश लिए जब, लेती होगी वायु हिलोरे…

उषा की आभा से रक्तिम होती होगी नभ की कोरें…

जग के आँगन में जब चिड़िया, गाती मधुर प्रभाती होगी…

लोहे की दीवारे पंछी कैसे तुझे सुहाती होंगी………..

मस्त विचार 164

अगर मौजे डूबो देती तो कुछ तस्कीन हो जाती…

किनारो ने डूबोया है, मुझे इस बात का गम है……… 

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