मस्त विचार 184
तेरे प्रेम ने दुनिया को झूठा कहना सीखा दिया.
किसी दर्द या खुशी का अहसास नहीं है अब तो.
सब- कुछ जिन्दगी में चुप- चुप सहना सीखा दिया.
तेरे प्रेम ने दुनिया को झूठा कहना सीखा दिया.
किसी दर्द या खुशी का अहसास नहीं है अब तो.
सब- कुछ जिन्दगी में चुप- चुप सहना सीखा दिया.
हमने तुम्हे ही विष पिलाया!
कैसा है आदमी मौला
के आज भी जीना न आया!!
रो रहे कुछ लोग तेरे प्यार में
रह रह तडप उठते हुआ जो तुम पर
हुकूमतें लेकिन वही हैं
सुकरात को जिनने जलाया!!
अच्छे लोग हैं कमतर
जाहिलों की दुनिया है
कभी मंसूर को काटा
कभी हजरत को सताया!!
तुम आये थे अमरित पिलाने
हमने तुम्हे ही विष पिलाया!!
जो निभा दे वो फ़रिश्ता है.
हर वक़्त तेरी याद मेरे साथ है.
मन तो करता है कि खुद से ही खुद को चुरा लूँ.
पर कहते हैं चोरी करना बुरी बात है.
यह कभी ठंडी लगे, तो यह कभी गर्म लगे .
तुम अगर बैठ भी जाओ, नजदीक में आकर .
सच में कहूं, सारी दुनिया ही मस्त लगे .
क्या तू सच में जीता .
अच्छा होता कि तू हार जाता .
तू तो जीत कर भी हारा ही है .
दुनिया में जो जीता वह भी हारा .
जो हारा वह तो हारा ही .
तूने क्या पाया ?
क्या करेगा इस जीत का .
किसको दिखायेगा , बताएगा.
खुशियाँ क्या मना पायेगा तू .
केवल बचा है तू और बना है सन्नाटे का बादसाह .
अपनी जीत के साथ अकेला खड़ा है .
तू जीता नहीं , हारा है .
तुझे क्या मिला ?