| Aug 31, 2014 | मस्त विचार
गीत गाता हूँ तुम्हे पाने के लिए,
जीत भी जाता हूँ कभी मैं हार जाने के लिए,
ये जिंदगी ही है ऐसी जिसका कुछ पता नहीं,
दूर जाता हूँ कभी मैं पास आने के लिए,
समझते जो मुझे दुश्मन ये उनकी ही है समझ
मैं तो खड़ा हूँ हर घड़ी सिर झुकाने के लिए,
गीत गाता हूँ तुम्हे पाने के लिए.
| Aug 30, 2014 | मस्त विचार
औरों के लिए जीते थे तो किसी को शिकायत ना थी ,
जरा सा अपने लिए क्या सोचा , जमाना दुश्मन बन गया.
| Aug 30, 2014 | मस्त विचार
दिल सुन के तेरा नाम धड़कता है अदब से….
हालांकि तुझे आँख से देखा भी नही………..
| Aug 30, 2014 | मस्त विचार
जो काम दुनिया को नामुमकिन लगे,
वही मौका होता है करतब दिखाने का.
| Aug 30, 2014 | मस्त विचार
यदि हम गुलाब की तरह खिलना चाहते हैं तो
हमें काँटों के साथ तालमेल की कला सीखनी होगी.
| Aug 30, 2014 | मस्त विचार
मैंने तुमको अपना जाना, अपने से भी ज्यादा माना.
पर इतना सब करने पर भी, तुमने क्या मुझको पहचाना.
तुम तो अब भी पहले जैसे, लगते हो वैसे के वैसे.
मै कितना मजबूर हुआ हूँ, अपनों से भी दूर हुआ हूँ.