मस्त विचार 178
कोई ना जाने, कोई ना जाने.
कोई ना जाने, कोई ना जाने.
आप को हर “वक्त”* पता होता है, आप के पास कितनी “दौलत” है,
लेकिन
आप कितनी भी *”दौलत” खर्च कर के यह नही जान सकते
आप के पास कितना ”वक्त” है !!
…..एक दिन उनके पीछे पूरा काफिला चलता है.
जीवन ख़त्म हो जाए इससे पहले .
सबके लिए कुछ कर जांऊ .
कर्ज है मुझ पर जीवन में .
सफ़र के साथियों का .
काश कुछ मेरे वश में होता .
उतार देता हर एक का क़र्ज़ .
मुझे थोड़ी हिम्मत मिले .
थोडा – सा सफ़र और तय करना है .
दुःख भीतर – भीतर रहता है, मन हर समय कुछ कहता है.
कुछ बात थी जो ख़त्म हो रही है, यादें हैं और विलाप है.
क्या होना था क्या हो गया, मन हर समय ही रो दिया.
कुछ कहने को भी तरशा, हाँ पर बात किससे करूँ.
क्या हुआ कोई भी नहीं कहता,आंसू का दरिया बहता रहता है.
कब से मैं नकाबों की तहे खोल रहा हूँ……..