मस्त विचार 157
देखते हो मस्त निगाहों से बार- बार.
मिलने की बारी आने से पहले मिलना हो गया कई बार.
मिलने की बारी आने से पहले मिलना हो गया कई बार.
हर समय बैठ कर सोचना, “मेरा क्या होगा ? मेरा क्या होगा ?”
तुझमे तो हर रोज ही इक नई अदा दिखती है..!!
अभी तक इस सोच में हूँ कि ‘क्या सोचूँ’ ………!!
_ गला ज़रूरतों का घोंट दिया..
तू मस्ती का राग छेड़ कर चला गया.