मस्त विचार 145

सब के कर्ज़े चुका दूँ मरने से पहले, ऐसी मेरी नीयत है;

मौत से पहले तू भी बता दे ज़िंदगी,

तेरी क्या कीमत है ?

मस्त विचार 142

जाम पर जाम पीने से क्या फायदा ?

रात बीती सुबह उतर जायेगी.

उनकी नजरों के दो घूंट पी लो.

सारी ज़िंदगी नशे में गुजर जायेगी.

मस्त विचार 140

मेरा जीवन बिखर गया है……..

तुम चुन लो, कंचन बन जाऊँ

तन- मन भूखा जीवन भूखा

सारा खेत पड़ा है सूखा

तुम बरसो अब तनिक तो

मैं आषाढ़ सावन बन जाऊँ.

मेरा जीवन बिखर गया है………….

बिन धागे की सुई ज़िन्दगी

सिये न कुछ बस चुभ- चुभ जाये

कब तक सहूँ यह क्रीड़ा

इतना दो न थकान मुझे

जब तुम आओ

मैं नयन खोल न पाऊँ.

मेरा जीवन बिखर गया है…………

तुम चुन लो, कंचन बन जाऊँ.

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