मस्त विचार 130
रिश्ता बनाना इतना आसन है ..
जैसे मिट्टी पे मिट्टी से मिट्टी लिखना
और निभाना इतना मुश्किल ..
जैसे पानी पे पानी से पानी लिखना
जैसे मिट्टी पे मिट्टी से मिट्टी लिखना
और निभाना इतना मुश्किल ..
जैसे पानी पे पानी से पानी लिखना
मुझे यकीन था, कुसूर मेरा ही निकलेगा.
यही पागलपन मेरे मन की वीणा पर, संगीत बन कर नाचेगा.
जिन्दगी जिन्दगी- सी लगती है.
तू ने तो अपनी पारसमणि से छूकर पारस ही बना दिया.
ये महकने की सज़ा हो जैसे……..