मस्त विचार 124
क्यूंकि मैं एहसास लिखता हूँ लोग अलफ़ाज़ पड़ते है………
क्यूंकि मैं एहसास लिखता हूँ लोग अलफ़ाज़ पड़ते है………
अभी कईं कर्ज चुकाना बाकी है.
कुछ दर्द मिटाना बाकी है, कुछ फर्ज निभाना बाकी है.
रफ्तार मे तेरे चलने से कुछ रूठ गये, कुछ छूट गये.
रूठों को मनाना , छुटे हुये को जुटाना अभी बाकी है.
कुछ हसरतें , कुछ जरूरी काम अभी बाकी है.
ख्वाईशें जो दबी रही इस दिल में,उनको दफनाना बाकी है.
कुछ रिश्ते बन कर टूट गये, कुछ जुडते जुडते छुट गये,
उन टुटे और छुटे रिश्तों के, जख्म मिटाना अभी बाकी है.
तू आगे चल मै आता हूं,
क्या छोड कर तुझे जी पाउंगा?
इन सांसो पर जिनका हक है, उनको समझाना अभी बाकी है.
आहीस्ता चल जिंदगी,
अभी कईं कर्ज चुकाना बाकी है.
आप संसार के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति हो.
ह्रदय में हो मेरे विशालता, बुद्धि में हो मेरे समता.
ज़माना क्या जाने हम कौन हैं.
जो खुद को नहीं जानता है.
वो हमें पूछता है तुम कौन हो.
_ सारे खिलौने छोड़ के जज्बातों से खेलते हैं.
_ उन्हें अलविदा कहने में कोई बुराई नहीं ..