मस्त विचार 098
रात नहीं ख्वाब बदलता है, मंजिल नहीं कारवां बदलता है.
जज्बा रखो जीतने का,
क्यूंकि किस्मत बदले न बदले पर वक़्त जरूर बदलता है.
जज्बा रखो जीतने का,
क्यूंकि किस्मत बदले न बदले पर वक़्त जरूर बदलता है.
भर लूँगा मै हर खुशियां, अपने दामन में.
और जहाँ से गुजरते हो,
उस जगह जिन्दगी के क़दमों के निशान छोड़ जाते हो.
चलो छोड़ो फूलों को, काँटों से महक जाओ.
वो चला है, जिसे अपना भी पता याद नहीं.
इस उम्मीद से कि ये नये रंग,
कुछ मेरी जिन्दगी भी बदल देंगे,
कुछ खुशियां जीवन में भर देंगे,
इस बार इन नये रंगो से खेलूँगा,
अँधेरों को छोड़कर उजालों से मिलूंगा.