मस्त विचार 086
क्या खूब कहा है…
“आसमां में मत दूंढ अपने सपनो को…
सपनो के लिए तो ज़मी जरूरी है,…
सब कुछ मिल जाए तो जीने का क्या मज़ा,…
जीने के लिये एक कमी भी जरूरी है”..
“आसमां में मत दूंढ अपने सपनो को…
सपनो के लिए तो ज़मी जरूरी है,…
सब कुछ मिल जाए तो जीने का क्या मज़ा,…
जीने के लिये एक कमी भी जरूरी है”..
पर बे- वजह खुश रहने का मज़ा ही कुछ और है .
जीवन में खुशियों कि कोई कमी नहीं होती, बस जीने का अंदाज़ होना चाहिए.
खुद भी रो पड़ते हैं यहाँ , औरों को रुलाने वाले .
मुश्किल हम खुद खरीदतें हैं .
और कुछ मिल जाये तो अच्छा होता,
बहोत पा लेने पर भी यही सोचतें हैं .
यूँ ही कोई इतना अजीज़ नही होता.