मस्त विचार 159
जीत कर हम वो नहीं सीखते, _
_ जो हार कर सीख जाते हैं..
_ जो हार कर सीख जाते हैं..
अगर यह हक़ इन्सान को दिया होता तो क्या होता.
मिलने की बारी आने से पहले मिलना हो गया कई बार.
हर समय बैठ कर सोचना, “मेरा क्या होगा ? मेरा क्या होगा ?”
तुझमे तो हर रोज ही इक नई अदा दिखती है..!!
अभी तक इस सोच में हूँ कि ‘क्या सोचूँ’ ………!!