मस्त विचार 074
निकल ही आएगा , कोई ना कोई रास्ता .
निकल ही आएगा , कोई ना कोई रास्ता .
अब किसी शख्श की आदत नहीं होती मुझको.
कोई खुशी बन कर ग़म में, क्यों बदल जाता है.
कोई मन में बस कर, ज़िन्दगी से दूर क्यों हो जाता है.
कोई जीवन को रंगों से भर कर, उजाड़ क्यों देता है.
कोई हमराह बन कर, राह में छोड़ क्यों जाता है.
क्यों और क्यों कोई ऎसा करता है.
कि इतना ख़ास हो कर, बेगाना बन जाता है.
क्यों कोई हमारा साथ छोड़कर, दूसरों का हो जाता है.
क्यों कोई हमें बताये बिना,
अपने दिल से बाहर निकाल देता है.
क्या हम इतने बुरे हैं.
कि उसे हमारे दर्द का, एहसास भी नहीं होता.
_ बेहद हुए करीब तो किस्सा हुआ ख़तम..!!
_ अब जब हम उनसे दूर हो गए हैं तो, अब वो निश्चित सुखी होंगे..!!
_ जब बिना किसी किंतु-परंतु के आपके द्वारा पूछे गए सवाल उसे परेशान करने लगें..!!
तुम चाहो तो प्रतिकूल को अनुकूल बना दो.
चाहने की देर है और बस कुछ भी नहीं.
तुम चाहो तो आसमान को धूल बना दो.
पता नहीं मन क्यों मुस्कुराता है.
तसल्ली होती है मेरे मन को
कि चलो, कोई तो है अपना
जो हर वक़्त याद आता है.
वो गिराएंगी बार बार, तू उठकर फिर से चलता चल..