मस्त विचार 008

मै खुद नहीं जानता कब तेरा हो गया.

भूल कर दुनिया सारी अब तेरा हो गया.

आते ही रहना भूल न जाना.

अब तो तेरा मेरा रिश्ता हो गया.

 

मस्त विचार 007

मुझको किताबों में कहाँ ढूँढोगे,

मै तुम्हारे ही मन पर लिखा अफ़साना हूँ.

मुझको पेड़ की शाखाओं में कहाँ पाओगे,

मै फूलों में छिपा खुशबू का खजाना हूँ.

नदिया में समन्दर में नहीं मिल सकता,

मै बहते हुए झरनों का ठिकाना हूँ.

दो कदम साथ तो चल कर देखो,

मेरे यार मै हमसफ़र बड़ा मस्ताना हूँ.

मस्त विचार 006

कैसे तुम को मैं बताऊँ.

मेरे मन के मीत हो तुम.

दूर नहीं पास हो तुम.

पास नहीं एहसास हो तुम.

तुम क्या जानो, तुम क्या हो.

कब तक मैं ऐसे जीऊँ.

कब तक आँसू यूँ छलकाऊँ.

मेरे जीवन का हर पल तुम्ही हो.

इस को यूँ मत व्यर्थ गँवाओ.

अब तो आ जाओ, कैसे मैं तुम को बताऊँ.

मस्त विचार 005

तुम क्यूँ नहीं नजरें मिलाते हो.

पास अपने क्यूँ नहीं बुलाते हो.

हर वक़्त तुम बहोत याद आते हो.

सही हुआ कि गलत पता नहीं,

पर मन में तुम्ही को बैठा बैठे.

तुम क्यूँ नहीं नजरें मिलाते हो.

 

मस्त विचार 004

नशा चढ़ा है क्या उतरेगा ?

पल में ही तूने कैसी प्रीत जगा दी.

मधुर- मधुर मुस्करा कर तुमने

मन में कैसी लगन लगा दी.

नशा चढ़ा है क्या उतरेगा ?

मस्त विचार 003

एक मुलाकात अपनों से कर ली.

एक अर्से बाद

अपनों से मुलाकात हुई

वे वैसे नहीं लगे

जैसे मेरी याद में हैं

अब तो अपनों से मिलना भी

अपने आप को दुःखी करना है

यह सब जानते हुए भी

एक मुलाकात अपनों से कर ली.

 

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