मस्त विचार 008
भूल कर दुनिया सारी अब तेरा हो गया.
आते ही रहना भूल न जाना.
अब तो तेरा मेरा रिश्ता हो गया.
भूल कर दुनिया सारी अब तेरा हो गया.
आते ही रहना भूल न जाना.
अब तो तेरा मेरा रिश्ता हो गया.
मै तुम्हारे ही मन पर लिखा अफ़साना हूँ.
मुझको पेड़ की शाखाओं में कहाँ पाओगे,
मै फूलों में छिपा खुशबू का खजाना हूँ.
नदिया में समन्दर में नहीं मिल सकता,
मै बहते हुए झरनों का ठिकाना हूँ.
दो कदम साथ तो चल कर देखो,
मेरे यार मै हमसफ़र बड़ा मस्ताना हूँ.
मेरे मन के मीत हो तुम.
दूर नहीं पास हो तुम.
पास नहीं एहसास हो तुम.
तुम क्या जानो, तुम क्या हो.
कब तक मैं ऐसे जीऊँ.
कब तक आँसू यूँ छलकाऊँ.
मेरे जीवन का हर पल तुम्ही हो.
इस को यूँ मत व्यर्थ गँवाओ.
अब तो आ जाओ, कैसे मैं तुम को बताऊँ.
पास अपने क्यूँ नहीं बुलाते हो.
हर वक़्त तुम बहोत याद आते हो.
सही हुआ कि गलत पता नहीं,
पर मन में तुम्ही को बैठा बैठे.
तुम क्यूँ नहीं नजरें मिलाते हो.
पल में ही तूने कैसी प्रीत जगा दी.
मधुर- मधुर मुस्करा कर तुमने
मन में कैसी लगन लगा दी.
नशा चढ़ा है क्या उतरेगा ?
एक अर्से बाद
अपनों से मुलाकात हुई
वे वैसे नहीं लगे
जैसे मेरी याद में हैं
अब तो अपनों से मिलना भी
अपने आप को दुःखी करना है
यह सब जानते हुए भी
एक मुलाकात अपनों से कर ली.