मस्त विचार 029
जिन्हें हम पा नहीं सकते सिर्फ चाह सकते हैं….
जिन्हें हम पा नहीं सकते सिर्फ चाह सकते हैं….
तो समझ लेना कि सौदा घाटे का ही है.
कुछ पल खुशियाँ पाने को, आँसू को पीना सीखा है.
ताने- उलहाने सुन कर मै, बना रहा हर बार अनजान.
लोग मुझे सताते रहे, मुझे न समझा कभी इन्सान.
सब्र के पनघट का पानी, घावों को नित सीना सीखा है.
रिश्तों कि मर्यादा में, घुट- घुट कर जीना सीखा है
ठोकर खाकर इतना जाना, स्वार्थ की पसरी है धुन्ध.
सब कुछ सहा खामोशी में, मैंने अपनी आँखे ली मूंद.
लोग दुःख पर दुःख देते रहे,मै ही जानता हूँ जो मुझपे बीता है.
रिश्तों कि मर्यादा में, घुट- घुट कर जीना सीखा है.
समझ नहीं आ रहा
एक कदम आगे बढ़ाऊँ
या दो कदम पीछे
समझ नहीं पाता हूँ
जब भी निकलता हूँ
पूरा का पूरा निकलता हूँ
लेकिन फिर जहाँ पहुँचता हूँ
वहाँ मेरे अलावा बहुत कुछ होता है
समझ नहीं आता क्या रुका रहूँ यूँ ही
समझ नहीं पा रहा
एक कदम आगे बढ़ाऊँ
या दो कदम पीछे.