मस्त विचार 058

मेरे मन में तू बसता था, पर मै तुझको जान न सका.

प्राणों से भी तू समीप था, पर मै ही तुझको पहचान न सका.

मस्त विचार 055

कुछ रिश्तों को कभी भी… नाम ना देना तुम…

इन्हें चलने दो ऐसे ही… इल्ज़ाम ना देना तुम.

ऐसे ही रहने दो तुम… तिश्नग़ी हर लफ़्ज़ में…

के अल्फ़ाज़ों को मेरे… अंज़ाम ना देना तुम.

मस्त विचार 054

मैं तो रोशन हूँ तेरे ही दीये की रोशनी से.

कभी न कभी तो बुझ जाऊँगा.

आज शिकायत है लोगों को मेरी रोशनी से.

कल अँधेरे में उन्हें बहोत याद आऊँगा.

मस्त विचार 053

जीवन मस्ताना बनने दो, आँखों से आँखों को मिलने दो.

कुछ तो मनमानी करने दो, कब तक तरसाओगे मन को.

कुछ बात करो तो बात बने, कुछ दूर हम तुम साथ चलें.

क्या खोया है क्या पाया है, जीवन कि कहानी कहने दो.

कुछ हँस के कुछ पा लेंगे हम, रोने से सब खो देंगे हम.

हाथों में हाथ मेरा ले लो, जीवन मस्ताना बनने दो.

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