मस्त विचार 058
मेरे मन में तू बसता था, पर मै तुझको जान न सका.
प्राणों से भी तू समीप था, पर मै ही तुझको पहचान न सका.
प्राणों से भी तू समीप था, पर मै ही तुझको पहचान न सका.
मतलब
जीवन का नाश होना.
कोई अच्छा लगा बस लगता चला गया.
इन्हें चलने दो ऐसे ही… इल्ज़ाम ना देना तुम.
ऐसे ही रहने दो तुम… तिश्नग़ी हर लफ़्ज़ में…
के अल्फ़ाज़ों को मेरे… अंज़ाम ना देना तुम.
कभी न कभी तो बुझ जाऊँगा.
आज शिकायत है लोगों को मेरी रोशनी से.
कल अँधेरे में उन्हें बहोत याद आऊँगा.
कुछ तो मनमानी करने दो, कब तक तरसाओगे मन को.
कुछ बात करो तो बात बने, कुछ दूर हम तुम साथ चलें.
क्या खोया है क्या पाया है, जीवन कि कहानी कहने दो.
कुछ हँस के कुछ पा लेंगे हम, रोने से सब खो देंगे हम.
हाथों में हाथ मेरा ले लो, जीवन मस्ताना बनने दो.