मस्त विचार 052
अपनो को छोड़ने की सलाह ग़ैरों से लेता है…
अपनो को छोड़ने की सलाह ग़ैरों से लेता है…
जीवन को हँस कर बिताया मैंने.
सफ़र ये आसान न होगा
जान कर भी कदम बढ़ाया मैंने.
ख़ुशी और गम जो भी मिले
दोनों.को गले लगाया मैंने.
इस दुर्गम रास्ते के काँटों से
जीवन अपना सजाया मैंने.
जीवन के पथरीले रास्ते पर
कभी सुख मिला, कभी दुःख मिला.
जिन्दगी ने वो तकलीफ है बख्सी.
मौत का खौफ खोने लगा हूँ.
काबिले भरोसे का कोई,
इन्सान नहीं मिलता.
पत्थरों से मन लगाने लगा हूँ.
लुटा रिश्तों के हाथों में इतना.
और लुटवाने कि हिम्मत खो चुका हूँ.
सच जानने कि जिद अधूरी रहेगी.
आदर्शों को अपनाना न सम्भव हुआ.
बे- परवाह अब मै सोने लगा हूँ.
अच्छा लगा, तेरा हँसना, मुस्कुराना.
अच्छा लगा, तेरे संग में चलना.
अच्छा लगा, तेरा मिलना, मिलाना.
पर अब दुःख है तेरे जाने का.
तू जो अब तक साथ रहा.
हर दिन तुमने मुझको कुछ सिखलाया.
सुख- दुःख में भी मेरे साथ रहा.
पर फिर भी कहूँगा, अच्छा लगा.
_ हम चुप रह कर भी बदनाम हो गए..
बस महोब्बत से याद करो चाहे मुद्दतों न बात करो..