सुविचार 712
आशा ही वह मधुमक्खी है जो बिना फूलों के शहद बनाती है.
व्यक्ति समय के अनुसार बदलता है.
सुकून ढूंढने चले थे और नींद ही गँवा बैठे.
अजब मुकाम पे ठहरा हुआ है काफ़िला ज़िन्दगी का,
ज़िन्दगी में बहुत सबेरे हैं, और थोड़े से बस अँधेरे हैं.
किस लिए गम तेरे घनेरे हैं, मुस्कुराने से किस ने रोका है,
वर्ना – दुनिया में सब कुछ पाने के लिए प्यार ही काफी है.