सुविचार 528

“दिव्य गुण – सहनशिलता, नम्रता, निर्भयता, अन्तर्मुखता, धैर्यता, मधुरता, हर्षितमुखता, पवित्रता”

सुविचार 527

किसी का बड़प्पन इस बात पर निर्भर है कि उसके सोचने का तरीका और काम करने का ढंग क्या है.

सुविचार 526

जीवन को अविकसित, असफल बनाने वाले कारणों में श्रम से घृणा और समय की बरबादी ही प्रमुख है.

मस्त विचार 496

आपकी खुशी केवल और केवल आपके हाथ में है, आप खुद को इतना कमजोर न बनायें कि परिस्थितियां आपको तोड़- मरोड़ दे.

कई बार परिस्थितियां इतनी ख़राब नहीं होती, जितना हम उन्हें सोच- सोच कर बना देते हैं, हर घटना पर बेवजह सोचना बन्द करें. आगे बढ़ें, घटनाओं को सहज तरीके से लें, बेवजह दुःखी न हों.

मस्त विचार 495

क्यूँ वक़्त के साथ रंगत खो जाती है,

हंसती- खेलती ज़िन्दगी आम हो जाती है,

एक सवेरा था जब हँस कर उठते थे हम,

आज बिना मुस्कुराये ही……………….

………………………….शाम हो जाती है.

सुविचार 524

जीवन के प्रति जिस व्यक्ति की कम से कम शिकायतें हैं, वही इस जगत में अधिक से अधिक सुखी है.

सुविचार 523

चलो माना कि दुनिया बहुत बुरी है, लेकिन आप तो अच्छे बनो, आप को किसने रोका है.
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