सुविचार 409
उत्थान और पतन की कुंजी चिन्तन की दिशा को माना गया है.
ऐसा ना हो के खुद से भी बिछड़ जाऊं और तू भी ना मिले….
पता ही नहीं ज़िन्दगी साँसों से चल रही है या तेरी यादों से.
जिधर भी देखूँ,,,,,,”तू-ही-तू” बिखरी पड़ी है..
कुछ लोग फिर पेश आ रहे हैं बहुत प्यार से….!!
वह कई प्रकार के सुखों को अपने साथ जोड़ लेता है.
और ज़िन्दगी की हर शाम तजुर्बे दे जाती है.