मस्त विचार 321
मेरे भीतर समा गया कोई, रूह पर छा गया कोई.
आप ही आप रह गया, मुझ को मिटा गया कोई.
आप ही आप रह गया, मुझ को मिटा गया कोई.
तुम ये दीवार गिराने मत आ जाना……..
कैसे- कैसे मेहरबां साथी बना लेता हूँ मैं…….
ज़माने ने समझा हमारा दौर ही ख़त्म हो गया.
आप कब गलत थे………इसे कोई कभी नहीं भूलता.
पसंद के लोग अक्सर बिछड़ते रहते हैं..!…..
फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमें ही उतार दिया.