मस्त विचार 269
किसे इस लहर में जा कर किनारा याद रहता है ?
सफ़र-ए-ज़िन्दगी का एक मुसाफ़िर सा मैं.., ख़ुद को
कहाँ ढुढ़ू ? अब मुझको चेहरा तुम्हारा याद रहता है………..
किसे इस लहर में जा कर किनारा याद रहता है ?
सफ़र-ए-ज़िन्दगी का एक मुसाफ़िर सा मैं.., ख़ुद को
कहाँ ढुढ़ू ? अब मुझको चेहरा तुम्हारा याद रहता है………..
पर क्यों रहूँ उदास, एक उम्मीद है बाकी……..
_ मन का घोड़ा खूब दौड़ाया, थक हार कर पास तेरे आया.
_ मन विछेप से भरा पड़ा था, मोह ममता से जला पड़ा था.
_ झूल रहा था अज्ञानता का झूला, आनन्द रूप हूँ था कब से भूला.
_ तू ने जोड़ लिया संग अपने, फिर मुझे काहे की देर थी.
_ तू ने जो ज्ञान सुनाया, मेरा आनन्द रूप मुझको जनाया.
_ भटक रहा था अन्धकार में, तेरा सहारा मुझे मिल गया.
वो लोग हमेशा अकेले पाये जाते हैं..,
जो दिल और जुबान के सच्चे होते हैं…
तो समझ लेना चाहिए की आप जीवन में सफल हो रहें हैं.
मेरी आँख से आँख मिला यार.
मेरे संग साथ रहो मेरे यार.
तेरे होने से खुद ही मौसम महकेगा.
तेरे साथ से दुनिया के सारे नज़ारों को भी थाम लूँगा.
विष अमृत में खुद बदलेगा यार.
मेरे कदम से कदम मिला मेरे यार.
जो मजबूरियों का रोना रोया नहीं करते.
पूरी कहानी है, जिसे ढोया है मैंने सालों से एक बोझ कि तरह.
बातें ऐसे कीजिए जिनमे हो अमृत्त भरा.
मीठी बोली बोल सब को प्रेम से पुकारिए.
कड़वे बोल बोल के न ज़िन्दगी गुजारिए.
हँसते- मुस्कुराते हुए ज़िन्दगी गुजारिए.
सागर से नदियाँ भली, जो सब की प्यास बुझाय.