सुविचार – जितनी चादर हो, उतने पैर पसाराे – 320

एक कहावत है, जितनी चादर हो, उतने पैर पसाराे.

_ मेहनती लोगों ने अपनी चादर को बड़ा किया, ताकि वे खुल कर पैर पसार सकें.
_ इसी तरह महत्वाकांक्षी लोगों के लिए कहा जा सकता है कि महत्वाकांक्षा ज़रूर पालो, परन्तु अपनी सामर्थ्य देख कर.
_ समर्थ व्यक्ति की ही महत्वाकांक्षा पूरी होती है. _ अपनी सामर्थ्य पर ध्यान नहीं दिया तो जगत में उपहास का पात्र बनोगे.!!
– Manika Mohini
“चादर छोटी हो तो पैर समेटना बुद्धिमानी है ;

और अगर पैर फैलाने हों, तो पहले चादर बड़ी करना सीखो”

Collection of Thought 060

Happiness does not depend of what happens to you. It depends on how you react to it.

खुशी इस बात पर निर्भर नहीं करती कि आपके साथ क्या होता है, _ यह इस पर निर्भर करता है कि आप इस पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं.

सुविचार – अग्रवाल समाज – Agarwal community – 316

राजस्थान के Agarwal community में परंपरागत रूप से 18 गोत्र (अठारह गोत्र) माने जाते हैं.

_ इन्हें “अठारह अग्रोहा गोत्र” भी कहा जाता है, जिनका संबंध Agroha और Maharaja Agrasen से जोड़ा जाता है.
📜 18 प्रमुख गोत्र (Agarwal)
1. गोयल (Goel / Goyal)
2. बंसल (Bansal)
3. मित्तल (Mittal)
4. सिंघल (Singhal)
5. जिंदल (Jindal)
6. तायल (Tayal)
7. बिंदल (Bindal)
8. कंसल (Kansal)
9. गर्ग (Garg)
10. कुच्छल (Kuchhal)
11. मंगल (Mangal)
12. नागल (Nagal)
13. ऐरन (Airan)
14. मधुकल / मधुकुल (Madhukul)
15. गोयन (Goyan)
16. बंसल
17. तिंगल
18. धारन 

सुविचार 315

गलती ज्ञान की शिछा है. जब आप गलती करो तो, उसे बहुत देर तक मत देखो, उस के कारण को ले लो और आगे की ओर देखो. भूत बदला नहीं जा सकता, भविष्य अब भी आपके हाथ में है.

सुविचार 314

बलवान होने में बड़प्पन नहीं है, बल का सदुपयोग करने में बड़प्पन है.
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