मस्त विचार 332

 उदार बनो पर इस्तेमाल मत होने दो,

प्यार करो पर खुद को ठेस न लगने दो,

विश्वास करो पर भोले मत बनो,

दूसरों की सुनो लेकिन अपनी आवाज मत खोने दो !!

मस्त विचार 331

माना कि मैं अमीर नहीं हूँ, यह बात तो सच है.

लेकिन कोई अपना बना ले तो, उसका हर ग़म खरीद सकता हूँ.

कामयाबी का रास्ता

बालक अब्दुल के मन में नई-नई बातों को जानने की जिज्ञासा थी. उस के मोहल्ले में एक मौलवी रहते थे. एक दिन अब्दुल उन के पास गया और बोला, ” मै कामयाब बनना चाहता हूँ, कृपया बताएँ कि कामयाबी का रास्ता क्या है ?
हँसते हुए मौलवी साहब बोले, ” बेटा, मै तुम्हें कामयाबी का रास्ता बताऊंगा, पहले तुम मेरी बकरी को सामने वाले खूंटे से बांध दो, ” कह कर उन्होंने बकरी की रस्सी बालक अब्दुल को थमा दी.
वह बकरी किसी के काबू में नहीं आती थी. अतः जैसे ही अब्दुल ने रस्सी थामी कि वह छलांग लगा, हाथ से छूट गई. फिर काफी मशक्कत के बाद बालक अब्दुल ने चतुराई से काम लेते हुए तेजी से भाग कर बकरी को पैरों से पकड़ लिया. पैर पकडे जाने पर बकरी एक कदम भी नहीं भाग पाई और अब्दुल उसे खूंटे से बांधने में कामयाब हुआ.
यह देख मौलवी साहब बोले, ” शाबाश, अब्दुल , यही है कामयाबी का रास्ता. जड़ पकड़ने से पूरा पेड़ काबू में आ जाता है. अगर हम किसी समस्या की जड़ पकड़ लें, तो उस का हल आसानी से निकाल सकते हैं. “
बालक अब्दुल ने इसी सूत्र को आत्मसात कर लिया और जीवन में आगे बढ़ता गया. यह बालक था अब्दुल गफ्फार खां. जिन्हें सीमांत गांधी के नाम से भी जाना जाता है. 

सुविचार 282

जो सब से ज्यादा व्यस्त है वह ही सब से अधिक समय निकाल सकता है. सुस्त व कामचोर ही हमेशा समय की कमी का रोना रोते रहते हैं.

 

सुविचार 281

समय और परिश्रम मनुष्य के दो सर्वोत्तम चिकित्सक हैं. परिश्रम से भूख तेज होती है और संयम अतिभोग को रोकता है.

सुविचार – अनजान- अनजाने लोग – Unknown people – 280

और यही तो सोचने वाली बात है, कि कैसे कुछ लोग यूँ ही टकरा जाते हैं और ख़ास हो जाते हैं.!!
सार्थक संबंध बनाएं : ऐसे लोग जो आपकी आत्मा को सांस लेने में मदद करें, न कि केवल आपके अहंकार को हंसाएं और बकवास करें.!!
कभी-कभी जीवन में ऐसा भी होता है कि कोई इंसान वर्षों तक हमारी दुनिया से अनजान और गुम सा रहता है, और फिर एक दिन अचानक हमारे सामने आ खड़ा होता है,

_ हैरानी की बात यह होती है कि हम उसे पहले से नहीं जानते, फिर भी उसके आने से एक अजीब-सी परिचित अनुभूति महसूस होने लगती है…!
कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें हम न जानते हैं, न कभी उनसे मिले होते हैं, न बात हुई होती है, न उन्हें देखा होता है- फिर भी जाने कैसे उनके लिखे हुए कुछ शब्द मन तक पहुँच जाते हैं और बिना किसी परिचय के भी एक अजीब सी तसल्ली दे जाते हैं.!!

सुविचार 279

द्वेष रखने वाला, मर्म स्थान पर प्रहार करने वाला, कठोर वाणी बोलने वाला, विरोध रखने वाला तथा धूर्त, बुरे कर्म करता हुआ शीघ्र ही बड़ी विपत्तियों में घिर जाता है.
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