सुविचार – सुविधा, Facility – 237

**हमें सुविधाएं तो सारी चाहिये.
_ लेकिन न तो उसकी तैयारी करते हैं न कुछ सोचते हैं.!!
**’सुविधा बदलती है’, लेकिन समझदार वही है, जो हर साधन को जीवन के अनुकूल बना ले.
**सुविधा (Facility)

_ आज का इंसान सुविधा से घिरा हुआ है…
_ हर काम आसान हो गया है…
_ लेकिन अजीब बात यह है कि
_ जीवन उतना ही उलझता जा रहा है.
👉 पहले लोग कम में भी संतुष्ट थे.
👉 आज सब कुछ होते हुए भी कमी महसूस होती है.
_ क्यों ?
_ क्योंकि
_ सुविधा बाहर बढ़ी है…
_ लेकिन अंदर की स्थिरता कम हो गई है.
_ हम जीवन को आसान बनाने के चक्कर में, उसे गहरा जीना भूल गए हैं.
👉 हर चीज instant चाहिए.
👉 हर feeling जल्दी बदलनी है.
👉 हर discomfort से भागना है.
लेकिन सच यह है –
_ जो चीजें हमें grow करती हैं… वो अक्सर uncomfortable होती हैं.
– सुविधा धीरे-धीरे हमें कमजोर बना देती है.
👉 patience कम हो जाता है.
👉 सहने की क्षमता घट जाती है.
👉 छोटी-छोटी बातों में disturb होने लगते हैं.
🌱– सही balance क्या है ?
_ सुविधा गलत नहीं है…
_ लेकिन उस पर depend हो जाना गलत है.
👉 सुविधा का use करो..
👉 लेकिन खुद को उसके बिना भी capable रखो.
🌿 Final truth
_ “सुविधा जीवन को आसान बना सकती है… लेकिन मजबूत नहीं बनाती”
देखें “क्या मैं सुविधा का उपयोग कर रहा हूँ… या सुविधा मुझे चला रही है ?”

मस्त विचार 187

देखो तो ख्वाब है ज़िन्दगी.

पढ़ो तो किताब है ज़िन्दगी.

सुनो तो ज्ञान है ज़िन्दगी.

हंसकर जियो तो आसान है ज़िन्दगी.

मस्त विचार 186

“ज़िन्दगी तू ही बता तुझे कैसे ना प्यार करूँ?

तेरी हर एक ‘सुबह’ मुझे

अपने से मिलने का जो एहसास दीलाती है”

मस्त विचार 185

निशचय ही मुझे जो कहना है, वह कहा नहीं जा सकता है. और जो कहा जा सकता है, वह मुझे कहना नहीं है. इसलिए ही तो इशारों से कहता हूँ, शब्दों के बीच छोड़े अन्तरालों से कहता हूँ. विरोधाभासों से कहता हूँ, या कभी न कहकर भी कहता हूँ. धीरे- धीरे इन संकेतों को समझने वाले लोग भी तैयार होते जा रहे हैं और न समझने वाले लोग दूर हटते जा रहे हैं – इससे मुझे बड़ी सुविधा होगी.

मस्त विचार 184

भरी दुनिया में अकेला मुझे रहना सीखा दिया.

तेरे प्रेम ने दुनिया को झूठा कहना सीखा दिया.

किसी दर्द या खुशी का अहसास नहीं है अब तो.

सब- कुछ जिन्दगी में चुप- चुप सहना सीखा दिया.

मस्त विचार 183

तुम आये थे हमे अमरित पिलाने,

हमने तुम्हे ही विष पिलाया!

कैसा है आदमी मौला

के आज भी जीना न आया!!

रो रहे कुछ लोग तेरे प्यार में

रह रह तडप उठते हुआ जो तुम पर

हुकूमतें लेकिन वही हैं

सुकरात को जिनने जलाया!!

अच्छे लोग हैं कमतर

जाहिलों की दुनिया है

कभी मंसूर को काटा

कभी हजरत को सताया!!

तुम आये थे अमरित पिलाने

हमने तुम्हे ही विष पिलाया!!

मस्त विचार 181

ऐ यार, तेरा साथ कुछ ख़ास है.

हर वक़्त तेरी याद मेरे साथ है.

मन तो करता है कि खुद से ही खुद को चुरा लूँ.

पर कहते हैं चोरी करना बुरी बात है.

मस्त विचार 180

ज़िन्दगी क्या है ? समझने में बड़ा वक़्त लगे .

यह कभी ठंडी लगे, तो यह कभी गर्म लगे .

तुम अगर बैठ भी जाओ, नजदीक में आकर .

सच में कहूं, सारी दुनिया ही मस्त लगे .

error: Content is protected