सुविचार – अदृश्य शक्ति – 277

इस बात पर आश्चर्य होता है कि कई बार कोई काम मैं सोचूं..

_ और वह काम मेरे करने से पहले ही अपने आप हो जाता है.!!

इंसान के जीवन में ना जाने कौन सी अदृश्य शक्ति काम करती है,

_ जिसके कारण जो बात हम कभी सोचते तक नहीं.. वही हो जाता है.
_ और जो सोचते है वह उम्र बीत जाती है और पूरी नहीं होती,
_ ऐसा जान पड़ता है कि व्यक्ति का सारा जीवन किसी ने पहले से लिख कर रखा है और सब कुछ उसी पर चल रहा.!!

मस्त विचार 328

काश….कि….मै इंसान न होता.

खुद से फिर अनजान न होता.

क्यों आया इस धरा पर मै.

सोच – सोच परेशान न होता.

तन की काया मन की माया.

घर वाले और बाहर वाले.

कितने टुकड़े करूँ मै खुद के.

करूँ मै खुद को किस के हवाले.

इसलिए मै अक्सर ही,

सोचा ये करता हूँ कि………..

कि काश कि मै होता एक पंछी.

फिर मुझे कोई रोक न पाता

सरहद के उस पार भी मै.

अपनी मरजी से जा पाता.

मिलता वहाँ मै सब से पर,

जंग की कोई बात न करता.

प्रेम के गीत उन्हें सुना कर.

अपने घर में आ जाता.

या काश कि मै होता एक वृच्छ……

देता सब को शीतल छाया.

भेद- भाव ना किसी से करता.

क्या अपना और क्या पराया.

पथिक जो मेरे पास आता.

सब को मीठे फल मै देता.

बदले में कुछ भी न लेता.

और काश कि मै होता एक बूंद……

तृष्णा किसी की मिटा तो पाता.

तृप्ति भले न कर पाता पर,

काम तो कुछ पल आ जाता.

और काश मै होता…..

काश कि होता एक कोरा पन्ना.

कोई मुझ पर तो कुछ लिख पाता.

वेद, पुराण और ग्रन्थ न सही,

एक छोटी- सी कविता ही.

जिसे पढ़ कर प्रेरित तो कुछ लोग होते.

और मै एक प्रेरक अंश बन जाता.

और भूल वश गर जुड़ जाता मै,

इतिहास के पन्नों संग.

फिर कोई तमन्ना शेष न होती,

क्यों कि…………………….

युगों तलक मै अमर हो जाता.

काश………कि……मै इंसान न होता.

मस्त विचार 327

किसी ने बर्फ से पुछा की, आप इतने ठंडे क्युं हो ?

बर्फ ने बडा अच्छा जवाब दिया :-

” मेरा अतीत भी पानी; मेरा भविष्य भी पानी…”

फिर गरमी किस बात पे रखु ??

मस्त विचार 326

किस दिन करोगे मुलाकात.

जवाब दो यार मेरी बात का.

कितने दिन बीत गए तुझ से बिछड़े.

जवाब दो मेरे यार मेरी बात का.

किस दिन करोगे मुलाकात.

सुविचार 276

दूध कितना भी शुद्ध हो, नींबू की एक बूंद ही उसे खराब करने के लिए काफी है. ऐसे ही निराशा का विचार नींबू का काम करता है, निराशा से आप अपनी शक्ति खो बैठते हैं. आपका विचार रूपी लावण्य, माधुर्य को छीन सकता है. विचार जीने के ढंग को बदल सकते हैं. संसार सब जगह है, स्थान बदलने से बात नहीं बनेगी, अंदर बदलाव आना चाहिए. अपने- आपको नहीं बदला तो घर, स्थान आदि बदलने से कुछ होने वाला नहीं. अपने को बदलने के लिए दिशा बदलनी होगी, दिशा को बदलने से दशा बदलेगी.

सुविचार 275

छोटी- छोटी वस्तुएं एकत्र करने से बड़े काम भी हो सकते हैं.

घास से बनायी हुई डोरी से भी हाथी बांधा जा सकता है.

मस्त विचार 325

रोने से तकदीर बदलती नही है,

वक्त से पहले कभी रात ढलती नहीं है.

दूसरो की कामयाबी लगती है आसान,

मगर कामयाबी रास्ते पर पड़ी मिलती नहीं है.

मिल जाती है कामयाबी अगर इत्तफाक से,

यह भी सच है की वह पचती नहीं है.

कामयाबी पाना है पानी मे आग लगाना,

पानी मे आग आसानी से लगती नहीं है.

ऐसा भी लगता है जिंदगी मे अक्सर,

दुनिया अपने जज्बात समझती नहीं है.

हर शिकस्त के बाद टूट कर जो संभल

गया फिर कौन-सी बिगड़ी बात बनती नहीं है.

हाथ बांधकर कभी सोचकर देखिये,

अपने आप कोई जिंदगी सँभलती नहीं है.

मस्त विचार 324

ये देखा है हमने आजमा कर.

लोग अक्सर धोखा देते हैं करीब आकर.

कहती है ये दुनिया पर ये दिल नहीं मानता.

एक दिन छोड़ जाओगे आप भी अपना बना कर. 

सुविचार – हम सभ्य हो गए – 274

हम सभ्य हो गए.

_ अब हम चीख-चीख कर नहीं लड़ते
_ हल्की आवाज में भी नहीं लड़ते
_ मौन होकर अपनी अरुचि दर्शाते हैं.
_ अब हम ठहाके नहीं लगाते
_ हा हा, ही ही, हू हू नहीं करते
_ अब हम स्मित मुस्कान मुस्काते हैं.
_ अब हम किसी से शिकायत नहीं करते
_ पहले शिकायत करना अपनापन लगता था
_ अब शिकायत करने से
_ आदमी छोटा बनता है
_ हम छोटे क्यों बनें ?
_ शब्दों का इस्तेमाल कम हो गया है
_ खामोशी की मनहूसियत छाई रहती है.
_ वो चहकने का काल पुराना हुआ
_ अब हम आधुनिक हैं
_ खामोश, अकेलेपन को झेलते हुए.
_ लड़ते थे तो वातावरण में जान थी
_ शोरगुल की एक अपनी शान थी.
_ सभ्य क्या हुए
_ चहचहाने के पल अलभ्य हो गए.
– Manika Mohini

मस्त विचार 323

रिश्ते वो नहीं, जो हम बनाते हैं,

रिश्ते वो हैं, जिन्हें वक्त बनाते हैं.

अपने वो नहीं, जिन्हें हम चाहते हैं,

अपने तो वो हैं, जो हमें चाहते हैं.

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