मस्त विचार 341

दुनियादारी में हम थोड़े कच्चे हैं,

पर दोस्ती के मामले में सच्चे हैं,

हमारी सच्चाई बस इस बात पर कायम है,

कि हमारे दोस्त हमसे भी अच्छे हैं.

सुविचार – Altu-faltu Baatein – आलतु–फालतू बातें – 283

सबसे ज़्यादा altu-faltu बातें वो होती हैं, जो सुनने में ज़रूरी लगती हैं पर ज़िंदगी में कुछ जोड़ती नहीं.

जैसे –
_ लोग क्या कहेंगे — बिना ये देखे कि वो लोग खुद क्या और कैसे जी रहे हैं ?
_ तुलना [Comparison] — किसी और की reel से अपनी real life तौलना.
_ स्टेटस [Status] और image [इमेज ] की चिंता — जबकि अंदर सब बिखरा है.
_ Future का बेकार anxiety — जिस पर हमारा control ही नहीं.
_ Past को बार-बार घूमना — जिससे कुछ सीखा नहीं जा रहा.
_ हर बात पर opinion देना — बिना experience के.
_ Busy दिखना — productive होने के नाम पर.
_ झूठी positivity — जब अंदर सब थका हो.
_ ज़रुरत से ज़्यादा समझना — लोगों को समझना ही नहीं चाहते.
Altu-faltu बात की पहचान simple है :
_ जो आपको ज्यादा शोर दे, पर जरा-सी भी स्पष्टता [clarity] न दे.
_ मेरे जैसे लोग अक्सर इसी शोर से थक जाते हैं..-
_ इसलिए ये कम बोलते हैं, गहरा सोचते हैं, और बेकार बातों से स्वाभाविक [naturally] रूप से दूर हो जाते हैं.!!

मस्त विचार 339

कहने को खुली किताब हूँ मैँ !

मगर सच कहूँ

तो एक राज़ हूँ मै!

सब को लगता है लहर हूँ,

नदी हूँ या समन्दर हूँ मै!

मगर सच कहूँ तो बस

प्यास हूँ मै!!

खुद का नौकर, खुद

का मालिक, खुद से आज़ाद हूँ मै!

हवाओँ

कि भी बन्दिश के बस सख्त खिलाफ़ हूँ मै!!

सब को लगता है रस्ता हूँ,

मन्जिल हूँ

या किनारा हूँ-मगर सच कहूँ

बस तलाश हूँ मै!

कहने को खुली किताब हूँ मै!

मगर सच कहूँ

तो राज़ हूँ मैँ!

चलना रूकना मेरी मर्जी-

अपनी खातिर इतना खास हूँ मै!

तुम समझोगे

खुशी हूँ गम हूँ हंसी हूँ

मगर सच कहूँ बस

एहसास हूँ मैँ!

अपनी जंग का खुद सिपाही बस

अपना हथियार हूँ मैँ!

तुम समझोगे सूरज हूँ,

चाँद हूँ, या सितारा हूँ

मगर सच कहूँ तो बस

आसमान हूँ मैँ!

अपनी जिद हूँ,

अपनी ख्वाहिश अपना ही विश्वास हूँ मै!

तुम समझोगे मौन हूँ,

अन्त हूँ, अंजाम हूँ मगर सच

कहूँ तो बस शुरूआत हूँ मैँ!

मस्त विचार 338

इन्कार किया जिन्होंने मेरा समय देखकर.

वादा है मेरा ऐसा समय भी लाऊंगा कि,

मिलना पड़ेगा मुझ से समय लेकर.

मस्त विचार 337

जीवन में कभी भी किसी को कसूरवार न बनाए,

अच्छे लोग खुशियाँ लाते है,,बुरे लोग,तजुर्बां,,,,।

मस्त विचार 334

अँधेरे कहाँ समझते हैं, मशाल के जलने का दर्द.

वजह कोई भी हो, हर सूरत में दोनों की मात तो है.

डूबने वाले के लिए फर्क नहीं, मझधार और किनारे में.

बेबसी का मतलब, ज़िन्दगी के उलझे हालात ही तो हैं.

मस्त विचार 333

हम तो खिलने को तैयार हैं, हम तो मिलने को बेकरार हैं.

मांगते नहीं तुझ से जन्नत, बस तुम से तुम्ही को मांगते हैं.

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