मस्त विचार 151
जो चल पड़े इस रास्ते पर फिर क्या भंवर
और क्या किनारा
किसको मंजिल की तलाश है
डूबने में ही मजा है
किनारे पर जाकर किसी को क्या मिला है.
जो चल पड़े इस रास्ते पर फिर क्या भंवर
और क्या किनारा
किसको मंजिल की तलाश है
डूबने में ही मजा है
किनारे पर जाकर किसी को क्या मिला है.
हर घड़ी हर लम्हा मुझको , बस तेरी तलाश है.
कभी तू साँसों की जुबां , कभी तू दिल की आस है
तू ही तू बातो का मंजर , तू ही मेरी प्यास है.
कभी तू आँखों की कशिश , कभी तू मन का राज है
तू ही तू इस दिल के अन्दर , तू ही मेरा साज है.
कभी तू लहराती पवन , कभी तू ग़म का राज है
तुझसे ही जन्नत है मेरी , तू ही मेरी आवाज है.
कभी तू माथे की चमक , कभी तू मेरा नाम है
तेरे ही हांथो से बनता , मेरा हर एक काम है.
कभी यू फूलो की महक , कभी तू प्यारा जाम है
तुझसे है रौशन है रोशनी , तू ही तो हर शाम है.
कभी न सोचना वहाँ कि तन्हा हो तुम ………
मूँद कर पलकों को अपनी जो देखोगे तुम ……
तो अपने साथ ही सदा मुझ को पाओगे तुम………
एक पुराना ख्वाब फिर से रो दिया.
चल दिया आगे जो पीछे छोड़ के,
चन्द टुकड़े पा लिए और सब खो दिया…..
अपनों में अपनों को.
दर है दीवार है, छत है और सब सामान
जो होतें हैं घरों में.
वे लोग भी हैं, जिनके होने से
मकान होता है घर.
बैचैन – सा घूमता हूँ इस घर में,
ढूंढ़ता हूँ किसी अपने को.
क्यों मै अपने को, अकेला महसूस कर रहा हूँ.
सब चीजें अपनी जगह ठीक है.
सारे रिश्ते, कोई भी रिश्ता बिखरा नहीं पड़ा.
फिर क्यों मै अलग – थलग, अनजान अजनबी – सा
ढूंढ़ता हूँ किसी को.
कुछ रूठने कि इच्छा है, कुछ टूटा हुआ हूँ मै
कोई चाहिए दुलारनेवाला.
भटक रहा हूँ अपने ही घर में.
अपने ही घर में, भटकता ढूंढ़ता हूँ.
ये दुनिया न मेरा घर है न तेरा ठिकाना.
मौत से पहले तू भी बता दे ज़िंदगी,
तेरी क्या कीमत है ?
दुनिया से, एक बुरा व्यक्ति कम हो जाएगा…
इसे बड़ी मेहनत से सीखना पड़ता है.
रात बीती सुबह उतर जायेगी.
उनकी नजरों के दो घूंट पी लो.
सारी ज़िंदगी नशे में गुजर जायेगी.