मस्त विचार 292

मैं वो खेल नहीं खेलता, जिसमें जीतना फिक्स हो.

क्योंकि

जीतने का मज़ा तब है, जब हारने का रिस्क हो.

मस्त विचार 291

कोई दुःख नहीं कोई सुख नहीं.

तू मिल गया मुझे कोई प्यास नहीं.

तू पिलाते ही रहना मै पीता रहूँगा.

तेरा साथ अब मै कभी ना छोडूंगा.

सुविचार – “सही दिशा में बढ़ना” – 254

“सही दिशा में बढ़ना”

_ ज़िंदगी में आगे बढ़ना कोई बड़ी बात नहीं,
हर कोई किसी न किसी दिशा में भाग रहा है.
_ मुद्दा ये नहीं कि हम चल रहे हैं या नहीं,
मुद्दा ये है कि किधर जा रहे हैं और क्यों जा रहे हैं.
_ सही दिशा अक्सर धीमी लगती है,
क्योंकि वहाँ शोर नहीं होता, बस सच्चाई होती है.
“तेज़ चलने से ज़्यादा ज़रूरी है — सही दिशा में चलना”
“चलना आसान है, लेकिन सही से आगे बढ़ना ?”
_ यह एक पूरी तरह से अलग बात है.!!

सुविचार 253

जीवन के ये 17 मूल आधार………!!!

01. आनन्द के लिए = संगीत,

02. खाने के लिए = गम,

03. पीने के लिए = क्रोध,

04. निगलने के लिए = अपमान,

05. व्यवहार के लिए = नीति,

06. लेने के लिए = ज्ञान,

07. देने के लिए = दान,

08. जीतने के लिए = प्रेम,

09. धारणे के लिए = धैर्य,

10. तृ्प्ति के लिए = संतोष,

11. त्यागने के लिए = लोभ,

12. करने के लिए = सेवा,

13. प्राप्त करने के लिए = यश,

14. फैंकने के लिए = ईर्ष्या,

15. छोडने के लिए = मोह,

16. रखने के लिए = इज्जत,

17. बोलने के लिए = सत्य.

सुविचार – आख़िर जीवन इतना कठिन क्यों है ? – 252

आख़िर जीवन इतना कठिन क्यों है ?

_ क्योंकि जीवन हमें हर पल सिखाने के लिए बना है, सुख देने के लिए नहीं..
_ हर कठिनाई में एक गुप्त पाठ छिपा होता है — जो हमें भीतर से और सच्चा, और गहरा बनाता है.
_ कठिनाई तब तक कठिन लगती है, जब तक हम उसे बाहरी दृष्टि से देखते हैं.
_ पर जब भीतर से देखने लगते हैं — वही दर्द बोध बन जाता है, वही संघर्ष साधना बन जाता है.
“जीवन कठिन नहीं, वह हर पल हमें सिखाता है.”

मस्त विचार – है खामोश मगर सब कुछ कह जाता है – 288

है खामोश मगर सब कुछ कह जाता है.

है रंगीन मगर दुनिया को बेरंग नजर आता है.

कठोरता उसकी फ़ितरत नहीं.

लोगों की फ़ितरत है उसे कठोर समझना.

ख़ामोशी उसकी आदत नहीं.

लोगों की गलतफहमी है उसे खामोश समझना.

है रास्ते में पड़ा पर कुछ नहीं कह पाता है.

है सोचता कहने को बहुत कुछ.

पर जब किसी के पैरों तले आ जाता है.

खुद चलते नहीं संभल कर, दुनिया वाले.

सौ गालियां देने से चूकते नहीं, दुनिया वाले.

रहते हो पत्थर की नीवं में तुम.

पूजते हो पत्थर की ही मूरत तुम.

समझना हो तो पत्थर के दिल को समझ लो.

पत्थर के जैसा अडिग बन कर.

दुनिया में अपनी भी जीत हासिल कर लो.

बस यही पत्थर की जुबानी है.

पत्थर की छोटी- सी यही कहानी है.

है खामोश मगर सब कुछ कह जाता है.

है रंगीन मगर दुनिया को बेरंग नजर आता है.

मस्त विचार 287

अक्सर वही लोग आप पर उठाते है उँगलियाँ,,

जिनकी तमन्ना आप से बराबरी करने की तो है ….

लेकिन औकात नहीं…!!

मस्त विचार 286

मैं जैसा भी हूँ…………अच्छा या बुरा……..अपने लिए हूँ…

मैं खुद को नहीं देखता……………..औरों की नजर से……

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