मस्त विचार 140

मेरा जीवन बिखर गया है……..

तुम चुन लो, कंचन बन जाऊँ

तन- मन भूखा जीवन भूखा

सारा खेत पड़ा है सूखा

तुम बरसो अब तनिक तो

मैं आषाढ़ सावन बन जाऊँ.

मेरा जीवन बिखर गया है………….

बिन धागे की सुई ज़िन्दगी

सिये न कुछ बस चुभ- चुभ जाये

कब तक सहूँ यह क्रीड़ा

इतना दो न थकान मुझे

जब तुम आओ

मैं नयन खोल न पाऊँ.

मेरा जीवन बिखर गया है…………

तुम चुन लो, कंचन बन जाऊँ.

मस्त विचार 139

एक छलनी है,

जो अपने आप छानती रहती है चीजों को,

जो अच्छे को अपना लेती है और खराब को किनारे कर देती है.

मस्त विचार 137

तेरे गोल्डेन फेस ने हर्ट पर अटैक किया.

सबको रिजेक्ट किया, तुम को सिलेक्ट किया.

तुमसे रिक्वेस्ट है, इसे रीफुज न करना.

ज्ञान के इस बल्ब को, फ्यूज न करना.

मस्त विचार 136

 होठों पे हंसी के फूल खिलाए रखना,

यादों को हमारी दिल में बसाए रखना,

चाहे आप से मुलाकात हो या ना हो,

पर हम से दोस्ती सदा बनाए रखना.

मस्त विचार 135

भीड़ में शामिल हो कर गर चलोगे,

बढ़ न पाओगे कभी तुम

गुमशुदा रह जाओगे.

भीड़ का हिस्सा नहीं

तुम भीड़ से हट कर दिखो.

वरना खुद की हस्ती से

खुद ही जुदा हो जाओगे.

मस्त विचार 134

ऎसा कोई दिन नहीं बीतता,

जिसमे तेरा गीत नहीं गूंजता.

मेरे जीवन के सूनेपन में, ऎसा रस बरसाया है तुमने.

इस जीवन में जो आनन्द है, उसमे बस तेरी ही धुन है.

मस्त विचार 133

जिन्दगी के सफर मे गुजर जाते हैं जाे मकाम

वाे फिर नही आते, वाे फिर नही आते

फूल खिलते हैं, लोग मिलते हैं मगर

पतझड़ मे जाे फूल मुरझा जाते हैं

वाे बहाराे के आने से खिलते नही

कुछ लाेग एक राेज बिछड जाते हैं

वाे हजाराे के आने से मिलते नही

उम्र भर चाहे काेई पुकारे उनका नाम

वाे फिर नही आते………..

आँख धाेखा है, क्या भराेसा है, सुनाे

शक दाेस्ती का दुश्मन है,

अपने दिल मे इसे घर बनाने ना दाे

कल तडपना पडे जिनकी याद मे

राेक लाे रूठ कर उनकाे जाने ना दाे……….

सुबह आती है रात जाती है यूही

वक्त चलता ही रहता है, रूकता नही

एक पल मे ये आगे निकल जाता है,

!!! आदमी ठीक से देख पाता नही

और परदे से मंजर बदल जाता है !!!!!!

एक बार चले जाते है जाे दिन रात सुबह शाम

वाे फिर नही आते……………

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