विरोधी वर्ग की नुक्ताचीनी योग्यता की सब से बड़ी प्रशंसा है.
सुविचार – बाज़ और चील – Falcons and eagles – 332
बाज़ और चील से भी बहुत अच्छे Life lessons निकाले जा सकते हैं – हालाँकि इन्हें literal “वैज्ञानिक नियम” नहीं, बल्कि प्रकृति से ली गई जीवन की उपमाएँ समझना बेहतर है.
चील से
बाज़ से
1. हर समय पंख फड़फड़ाने की जरूरत नहीं होती.
_ चील हवा की धाराओं का इस्तेमाल करके लंबे समय तक उड़ती है.
Lesson: हर चीज़ को अपनी ताकत से धक्का देने के बजाय कभी-कभी परिस्थितियों को समझकर उनके साथ चलना भी बुद्धिमानी है.
2. ऊँचाई से तस्वीर अलग दिखाई देती है.
_ ऊपर से देखने पर छोटी-छोटी चीज़ें उतनी बड़ी नहीं लगतीं.
Lesson: समस्या के बहुत करीब खड़े होकर निर्णय मत लो.
थोड़ा पीछे हटो – दृष्टि बदल सकती है.
3. अकेले उड़ना हमेशा अकेलापन नहीं है.
_ हर समय भीड़ का हिस्सा बने रहना जरूरी नहीं.
Lesson: अपने रास्ते पर अकेले चल पाने की क्षमता भी स्वतंत्रता है.
4. लक्ष्य पर ध्यान
_ शिकारी पक्षियों की दृष्टि और ध्यान उनकी बड़ी ताकत है.
Lesson: हर दिशा में देखने वाला व्यक्ति अक्सर किसी एक दिशा में बहुत दूर नहीं जाता
5. मौसम से लड़ना नहीं, उसे पढ़ना
_ हवा, ऊँचाई और परिस्थितियों को समझना उड़ान का हिस्सा है.
Lesson: जीवन में हर परिस्थिति को बदलना जरूरी नहीं ;
कुछ परिस्थितियों को समझकर उनके अनुसार चलना ज्यादा समझदारी है.
1. गति से ज्यादा timing
_ बाज़ की ताकत केवल उसकी तेजी नहीं, बल्कि सही क्षण पहचानने में भी है.
Lesson: हर अवसर के पीछे भागना जरूरी नहीं.
_ कभी-कभी सही समय का इंतजार ही बुद्धिमानी है.
2. ऊर्जा [Energy] बचाकर रखो
_ हर समय सक्रिय रहने वाला व्यक्ति जल्दी थक सकता है.
Lesson: अपनी ऊर्जा हर जगह खर्च मत करो – जहाँ सच में जरूरत हो, वहीं लगाओ.
3. ध्यान भटकने मत दो
_ उसकी शिकार-प्रक्रिया में focus महत्वपूर्ण है.
Lesson: दूसरों की आवाज़, तुलना और अनावश्यक चीज़ों में अपनी मानसिक ऊर्जा मत बाँटो.
– “हर चीज़ से लड़कर ऊपर उठना जरूरी नहीं ;
कभी-कभी हवा को समझ लेना ही पर्याप्त होता है”
– “ऊँचाई केवल ऊपर उठने से नहीं मिलती, दृष्टि बदलने से भी मिलती है”
मस्त विचार 363
दिल था अकेला और गम थे हजारों,
अकेले को मिलके हजारों ने लूटा !!
सुविचार 331
जैसे गूंगे के संकेत को गूंगा ही आसानी से पहचान पाता है. उसी प्रकार ज्ञानी के सुख को वही जान पाता है, जो खुद भी ज्ञानी होता है.
सुविचार – दुनिया किसको कहते हैं..? – 330
दुनिया किसको कहते हैं..?
_ दुनिया कोई जगह नहीं है.
_ दुनिया एक धोखा है, जो सबको अलग-अलग दिखता है.
_ एक भूखे के लिए दुनिया एक रोटी है.
_ एक आशिक के लिए दुनिया उसकी महबूबा है.
_ एक व्यापारी के लिए दुनिया एक बाजार है.
_ एक संत के लिए दुनिया एक नाटक है.
_ और एक बच्चे के लिए दुनिया उसकी माँ की गोद है.
– दुनिया बाहर नहीं, अंदर है.
_ तुम उदास हो तो दुनिया उदास लगती है,
_ तुम खुश हो तो दुनिया भी नाचती हुई लगती है.
_ वो तो एक आईना है.
_ जैसा चेहरा लेके जाओगे, वैसा ही दिखाएगी.
– असली परिभाषा सुनोगे मित्र ?
_ दुनिया उस मेले को कहते हैं,
_ जहाँ सब आए हैं खोने के लिए, और ढूंढने का नाटक कर रहे हैं.!!
मस्त विचार 362
हर ज़ख्म की आगोश में है दर्द तुम्हारा……..
हर दर्द में सुकून का एहसास भी तुम हो………..
मस्त विचार 361
इक पल ही काफी है गर उसमे …तुम शामिल हो जाओ,
इससे ज्यादा जिंदगी की मुझे, जरुरत भी नहीं.
मस्त विचार 360
ऐ यार, दूरियां हैं बहुत पर इतना समझ लो.
पास रह कर ही कोई रिश्ता ख़ास नहीं होता.
तुम इतने मेरे पास हो कि ,
दूरियों का एहसास नहीं होता.
मस्त विचार 359
हजूम-ऐ- गम में लोगो को हँसा देता हुं…..
मुझ से कोई मुझ सा नहीं देखा जाता………..
मस्त विचार 358
ऐ यार, मैं क्यूँ खामोश रहता हूँ.
क्यूँ उदास रहता हूँ.
क्यूँ समस्याओं से उलझा हूँ.
मेरा तो काम है चलना.
शायद ये भूल जाता हूँ कि
राहों से निकलती हैं राहें.
अभी तो मुझे कई मंजिलों को तय करना है.
अभी तो जीवन में और सफर करना है.
पहले भी जब सफर पे निकला था.
तू ने ही मुझे मंजिल तक पहुँचाया था.
ऐ यार, फिर भी उदास तथा दुविधाओं में क्यूँ हूँ ?





