मस्त विचार 131
बन गयी किस्मत मेरी, मिट गया बिगड़ी तकदीर का डर.
बन गयी किस्मत मेरी, मिट गया बिगड़ी तकदीर का डर.
जैसे मिट्टी पे मिट्टी से मिट्टी लिखना
और निभाना इतना मुश्किल ..
जैसे पानी पे पानी से पानी लिखना
मुझे यकीन था, कुसूर मेरा ही निकलेगा.
यही पागलपन मेरे मन की वीणा पर, संगीत बन कर नाचेगा.
जिन्दगी जिन्दगी- सी लगती है.
तू ने तो अपनी पारसमणि से छूकर पारस ही बना दिया.
ये महकने की सज़ा हो जैसे……..
क्यूंकि मैं एहसास लिखता हूँ लोग अलफ़ाज़ पड़ते है………
१. इबादत के वक़्त अपने दिल को क़ाबू मे रखो.
२. किसी के घर जाओ तो आँख को क़ाबू मे रखो.
३. किसी महफ़िल मे जाओ तो ज़बान पे क़ाबू रखो.
४. जब खाने बैठो तो पेट को क़ाबू मे रखो.
५. अपनी नेकियाँ और दूसरों की बुराई भूल जाओ.
६. रब और मौत को हमेशा याद रखो.
_ हमारा ध्यान अपने जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में ले जाने पर होना चाहिए.!!
_ बेहतर [ Better ] होने के लिए, _कड़ी मेहनत करनी पड़ती है..!!
_ क्योंकि आप उनसे बेहतर हैं, उनसे तेज़ हैं और आप बहुत बेहतर दिखते हैं.!!
_ फ़ालतू चीजें सिर्फ और सिर्फ आपको भटकाने के लिए ही होती हैँ.!!