मस्त विचार 123

आहीस्ता चल जिंदगी,

अभी कईं कर्ज चुकाना बाकी है.

कुछ दर्द मिटाना बाकी है, कुछ फर्ज निभाना बाकी है.

रफ्तार मे तेरे चलने से कुछ रूठ गये, कुछ छूट गये.

रूठों को मनाना , छुटे हुये को जुटाना अभी बाकी है.

कुछ हसरतें , कुछ जरूरी काम अभी बाकी है.

ख्वाईशें जो दबी रही इस दिल में,उनको दफनाना बाकी है.

कुछ रिश्ते बन कर टूट गये, कुछ जुडते जुडते छुट गये,

उन टुटे और छुटे रिश्तों के, जख्म मिटाना अभी बाकी है.

तू आगे चल मै आता हूं,

क्या छोड कर तुझे जी पाउंगा?

इन सांसो पर जिनका हक है, उनको समझाना अभी बाकी है.

आहीस्ता चल जिंदगी,

अभी कईं कर्ज चुकाना बाकी है.

 

 

 

मस्त विचार 121

जिन्दगी हरदम रहे महकती, चेहरे पर रहे हरदम प्रसन्नता.

ह्रदय में हो मेरे विशालता, बुद्धि में हो मेरे समता.

मस्त विचार 120

ज़माना पूछता है तुम कौन हो.

ज़माना क्या जाने हम कौन हैं.

जो खुद को नहीं जानता है.

वो हमें पूछता है तुम कौन हो.

मस्त विचार 119

इस दुनिया के लोग भी बड़े अजीब हैं, _

_ सारे खिलौने छोड़ के जज्बातों से खेलते हैं.

जो लोग आपके जज्बातों की कदर नहीं करते, _

_ उन्हें अलविदा कहने में कोई बुराई नहीं ..

मस्त विचार 118

ऐ यार, मैंने तो एक तुम पर ही चाहत ख़त्म कर दी…….

…….. अब प्रेम किसको कहते हैं मालूम नहीं……………

मस्त विचार 117

पिन्जरे में बन्द था मै, तूने आजाद किया.

क्या करूँ लाचार था, दुनिया की निर्दयता का दास था.

तूने आज़ाद किया.

मस्त विचार 116

मै हवा में उड़ती खुशबू को अपने भीतर समेटना चाहता हूँ

और चाँद से खुशबू निचोड़ने का हुनर भी सीखना चाहता हूँ.

मस्त विचार 115

ऐे यार, कोई शब्द सुना दे.

आँखों से अच्छा कुछ दिखा दे.

जिधर भी देखूं तू ही दिखे, मस्ती कुछ ऎसी तू ला दे.

मस्त विचार 114

जीवन के पथरीले रास्ते पर.

कुछ खोया कुछ पाया हमने.

कहीं धूप मिली कहीं छांव मिली.

हर मौसम को हंसकर कर बिताया हमने.

सफ़र ये आसान न होगा.

जानकार भी कदम बढ़ाया हमने.

खुशी और गम जो भी मिले.

दोनों को गले लगाया हमने.

कुछ खोया, कुछ पाया हमने.

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