मस्त विचार 113
किसी के काम आने के लिए
पर वक्त बीत रहा है
कागज के टुकड़े कमाने के लिए
क्या करूँगा इतना पैसा कमा कर
ना कफन मे जेब है ना कब्र मे अलमारी
और ये मौत के फ़रिश्ते तो रिश्वत
भी नही लेते…
किसी के काम आने के लिए
पर वक्त बीत रहा है
कागज के टुकड़े कमाने के लिए
क्या करूँगा इतना पैसा कमा कर
ना कफन मे जेब है ना कब्र मे अलमारी
और ये मौत के फ़रिश्ते तो रिश्वत
भी नही लेते…
क्यूंकि जानने वाले ही जानते हैं, जीना क्या है.
मै कितना रोऊंगा बता न सकूंगा .
ग़म इसका नहीं कि आप मिल न सकोगे .
दर्द इस बात का होगा कि मै आपको भुला न सकूंगा .
पर ऊँचा उठने के लिए झुको जरूर.
मुझे हालात ने ऎसा बना दिया था.
सोचा, मेरा जीना अब व्यर्थ है.
इतनी हानि, अपमान कि चली आंधी.
और आप मिल गए मशीहा बनकर,
आपके आशीष कि थपथपाहट ने,
प्राण नए दे दिए जीवन को.
और ज़िन्दगी को नई राह मिल गयी.
मेरी तरह आपने लाखों के जीवन को संवारा है.
थक चुके थे जो ज़िंदगी कि राहों से, उन्हें उबारा है.
आप-सा कौन है, जो गले लगा ले गिरतों को.
और उन्हें मरना नहीं, जीना सिखा दिया.
सजाया है मैंने घर को, आपके ही नाम से.
मन के कछ में, गृह के हर कछ में आप हो.
कम ही सुन पाती है.