मस्त विचार 061

मुझे स्थायीत्व पाने में वर्षों लग गये.

इस दौरान मुझे कई कटु अनुभव हुए.

इन्ही संघर्षों ने मुझे बहुत कुछ सीखाया.

जिससे मेरे जीवन को नया आकार मिला.

मस्त विचार 060

ये मेरा कर्त्तव्य है कि मै तेरे समीप जाऊँ.

कुछ सीखूँ, समझूँ और जब लौट कर घर आऊँ

तो हर सीखी हुई बात को अपने जीवन में उतारूँ.

वक्त के साथ बदलने में कोई बुराई नहीं है,

शर्त सिर्फ यह है कि बदलाव बुरा नहीं होना चाहिए.

मस्त विचार 059

तू मुझसे मुहब्बत करता है,

इसलिए तू मेरा इम्तहान लेता है,

और इम्तहान से बाहर आने के लिए,

इम्तहान में पूरा उतरने के लिए,

ताकत भी तू ही देता है.

मस्त विचार 058

मेरे मन में तू बसता था, पर मै तुझको जान न सका.

प्राणों से भी तू समीप था, पर मै ही तुझको पहचान न सका.

मस्त विचार 055

कुछ रिश्तों को कभी भी… नाम ना देना तुम…

इन्हें चलने दो ऐसे ही… इल्ज़ाम ना देना तुम.

ऐसे ही रहने दो तुम… तिश्नग़ी हर लफ़्ज़ में…

के अल्फ़ाज़ों को मेरे… अंज़ाम ना देना तुम.

मस्त विचार 054

मैं तो रोशन हूँ तेरे ही दीये की रोशनी से.

कभी न कभी तो बुझ जाऊँगा.

आज शिकायत है लोगों को मेरी रोशनी से.

कल अँधेरे में उन्हें बहोत याद आऊँगा.

मस्त विचार 053

जीवन मस्ताना बनने दो, आँखों से आँखों को मिलने दो.

कुछ तो मनमानी करने दो, कब तक तरसाओगे मन को.

कुछ बात करो तो बात बने, कुछ दूर हम तुम साथ चलें.

क्या खोया है क्या पाया है, जीवन कि कहानी कहने दो.

कुछ हँस के कुछ पा लेंगे हम, रोने से सब खो देंगे हम.

हाथों में हाथ मेरा ले लो, जीवन मस्ताना बनने दो.

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