मस्त विचार 070
पता नहीं मन क्यों मुस्कुराता है.
तसल्ली होती है मेरे मन को
कि चलो, कोई तो है अपना
जो हर वक़्त याद आता है.
पता नहीं मन क्यों मुस्कुराता है.
तसल्ली होती है मेरे मन को
कि चलो, कोई तो है अपना
जो हर वक़्त याद आता है.
वो गिराएंगी बार बार, तू उठकर फिर से चलता चल..
जो चट्टानों से ही न उलझे वो झरना किस काम का.
_ अकल का बोझ उठा नहीं सकता !!
तू चाहे तो फिर बहार आये.
फिर से तू मुझको खिला दे.
फिर से तू जीवन मस्त बना दे.
_ की उदास होने का वक़्त ही ना मिले..
सभी राज़ नहीं होते बताने वाले.
कभी पास आकर देखो हमें.
कैसे रोते हैं दूसरों को हंसाने वाले.
रिश्ता बनाया है तो निभाएंगे.
हर पल सबको यों ही हंसाएंगे.
_ आसानी से नहीं मिले हो तुम, वक़्त काफी लगा कर पाया है तुम्हे.!!
कौन- सी राह चलूँगा, चुनाव कर लूँगा.
मुसाफ़िर हूँ, मै भीड़ का हिस्सा नहीं.
खुली फ़िजा में, हवाओं में साँस भर लूँगा.