मस्त विचार 070

जब तेरा नाम जबान पर आता है.

पता नहीं मन क्यों मुस्कुराता है.

तसल्ली होती है मेरे मन को

कि चलो, कोई तो है अपना

जो हर वक़्त याद आता है.

मस्त विचार 069

ठोकरें अपना काम करेंगी, तू अपना काम करता चल.

वो गिराएंगी बार बार, तू उठकर फिर से चलता चल..

मस्त विचार 068

निखरती है मुश्किलों से ही शख्सियत यारों,

जो चट्टानों से ही न उलझे वो झरना किस काम का.

 

मस्त विचार 066

तू चाहे तो फिर खिल जाऊँ.

तू चाहे तो फिर बहार आये.

फिर से तू मुझको खिला दे.

फिर से तू जीवन मस्त बना दे.

मस्त विचार 064

मेरी असलियत से अनजान हैं ज़माने वाले.

सभी राज़ नहीं होते बताने वाले.

कभी पास आकर देखो हमें.

कैसे रोते हैं दूसरों को हंसाने वाले.

रिश्ता बनाया है तो निभाएंगे.

हर पल सबको यों ही हंसाएंगे.

मस्त विचार 063

पलकों पे अपने बैठाया है तुम्हे, बड़ी दुआओं के बाद पाया है तुम्हे.

_ आसानी से नहीं मिले हो तुम, वक़्त काफी लगा कर पाया है तुम्हे.!!

मस्त विचार 062

पाँव नंगे हैं, मगर मै सफ़र पे निकला हूँ.

कौन- सी राह चलूँगा, चुनाव कर लूँगा.

मुसाफ़िर हूँ, मै भीड़ का हिस्सा नहीं.

खुली फ़िजा में, हवाओं में साँस भर लूँगा.

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