मस्त विचार 104
पहचानने लगा हूँ, तुम्हारी नजर को मैं.
पहचानने लगा हूँ, तुम्हारी नजर को मैं.
ख़ुशी में रो पड़ोगे और ग़मों में मुस्कुराओगे.
या तो डायरियों में दर्ज़ है _ या चुप्पियों में कैद …!
बीत रहा हर लम्हा आपकी दोस्ती के साये में, कुछ इस तरह कायल आपने दोस्ती का बना लिया.
इन लकीरों में आपका नाम छुपा था, मेरी तक़दीर में अनजाने दोस्त का पैगाम भी छुपा था.
बरसी इनायत इस कदर ख़ुदा कि मुझ पर, कि फूल-सा दोस्त मेरे भी आंगन में खिला दिया.
आपकी दोस्ती से मुझे एक जूनून मिला है, गिरती ठोकरों में उठाते हाथ का सकून मिला है.
डूब जाती है हर उठती लहर इस दोस्ती कि गहराई में, मेरी कश्ती जो तैरा दे, ऐसा दोस्त दिया है.
अँधेरे में आपने एक दीप जलाया है, कुछ टूटे सपनो को, फिर इन आँखों में सजाया है.
रोशन है हर राह मेरी आपके नूर से, कि हर राह को रोशन करता चाँद, फलक पर बैठा दिया.
अरज है मेरी आपसे दूर न होना, मेरी किसी ख़ता से रूठ मत जाना.
आपकी दूरी से कहीं बिखर न जांऊ मै, कुछ ऐसा कायल आपने अपनी दोस्ती का बना लिया.
कि एक जाम ख़ुदा ने दोस्ती का पिला दिया.
मन में छिपा एक आसमान है,
जो इस जमीं से दोगुना है,
रोशन कर दूंगा इस दुनिया को,
बस एक मौका पाना है,
बाँध ली है गाँठ मन में,
जो अन्दर है उसे बाहर लाना है.
जज्बा रखो जीतने का,
क्यूंकि किस्मत बदले न बदले पर वक़्त जरूर बदलता है.
भर लूँगा मै हर खुशियां, अपने दामन में.
और जहाँ से गुजरते हो,
उस जगह जिन्दगी के क़दमों के निशान छोड़ जाते हो.
चलो छोड़ो फूलों को, काँटों से महक जाओ.