मस्त विचार 094
वो चला है, जिसे अपना भी पता याद नहीं.
वो चला है, जिसे अपना भी पता याद नहीं.
इस उम्मीद से कि ये नये रंग,
कुछ मेरी जिन्दगी भी बदल देंगे,
कुछ खुशियां जीवन में भर देंगे,
इस बार इन नये रंगो से खेलूँगा,
अँधेरों को छोड़कर उजालों से मिलूंगा.
भली मालुम होती है बुरी महसूस होती है,
जो हाजिर है कभी उन पर तबज्जो ही नहीं जाती,
नहीं जो सामने उसकी कमी महसूस होती है.
अदब से कही गई, हर बात का वजन होता है.
कुछ मुश्किलें इधर भी हैं, उधर भी.
कहने को बहुत कुछ है, मगर किसे कहें हम.
कब तक यों ही खामोश रहें और सहें हम.
मन करता है दुनिया कि हर रस्म उठा दें.
दीवार जो दोनों तरफ है, आज गिरां दे.
पर कुछ मजबूर हालात इधर भी है, उधर भी.
आज मैं समझदार हूँ, इसलिए खुद को बदल रहा हूँ.
आप खोजने लग जाओ तो पाने को बहुत है.
वो हँसा नहीं सकते , हम रुला नहीं सकते .
साथ इतना खूबसूरत है हमारा .
वो बता नहीं सकते , और हम जत्ता नहीं सकते .