सुविचार 4382

किसी के साथ हुए कटु अनुभव के भावनात्मक बोझ से छुटकारा पाने का एकमात्र उपाय उसे छमा कर देना है.
हर इंसान अपने कर्मों का बोझ लेकर जीता है.

_ हो सकता है वो बाहर से सामान्य दिखे, लेकिन भीतर कहीं न कहीं उन्हें सच पता है.
_ आपकी पीड़ा का अनुभव चाहे उन्हें आज न हो, पर जीवन में किसी मोड़ पर यह कचोट उन्हें अवश्य मिलेगी.!!

मस्त विचार 4256

सफर तो मुश्किल है, मगर तू साथ मत छोड़ना,

_ सारी उम्मीदें तुमसे ही है, तू हाथ मत छोड़ना.

कभी-कभी सफर अधूरे रह जाते हैं..  और जिंदगी पूरी हो जाती है.!!

सुविचार 4381

टेंशन, डिप्रेशन और बैचैन इंसान तभी होता है,

_ जब वो खुद के लिए कम और दूसरों के लिए ज्यादा सोचता है.

अब तो टेंशन लेने की इतनी आदत हो गई है, कि कभी टेंशन न हो तो टेंशन होने लगती है कि सब कुछ ठीक कैसे चल रहा है.!!

मस्त विचार 4255

मेरा अंदाज़ा कोई न लगाए तो ही ठीक रहेगा,

_ क्योंकि अंदाज़ा बारिश का लगाया जाता है, तूफ़ान का नहीं..!!

बारिश बहा ले जाती है बहुत कुछ, लेकिन कभी-कभी यह अपने पीछे एक ऐसा सन्नाटा छोड़ जाती है जो भीतर तक भिगो देता है.!!
छाता इस्तेमाल करने का मतलब यह नहीं कि आप पानी से बच गए..

_ जो पानी आपको डुबोता है वह आपके पैरों से आता है, आपके सिर से नहीं.!!

सुविचार 4380

खतरनाक लोग पहले अपनापन दिखाते हैं, और फिर जब हम उन पर हद से ज्यादा भरोसा कर लेते हैं, तो निगल जाते हैं.

Collection of Thought 1036

“Failure doesn’t mean the game is over, it means try again with experience.”

” असफलता का मतलब यह नहीं है कि खेल खत्म हो गया है, इसका मतलब है कि अनुभव के साथ फिर से प्रयास करें “

सुविचार 4379

मात्र एक सकारात्मक विचार आपके कार्य करने की ऊर्जा को 4 गुना तक बढ़ा सकता है.

मस्त विचार 4254

कल वो चालाक था, इसलिए दुनिया को बदलना चाहता था ;

आज वो बुद्धिमान है, इसलिए अपने आप को बदल रहा है.

चिड़िया को उतना चालाक होना ही पड़ता है,

_ जितना जंगल बचाये रखने और ज़िंदा रहने के लिये जरूरी है.!!

जहाँ लोग चालाकी को काबिलियत समझ लें, वहाँ एक साफ़ दिल इंसान का चुपचाप भीड़ से निकल जाना ही उसकी सबसे बड़ी जीत है.!!
चालाकियों से किसी को कुछ देर तक मोहित किया जा सकता है,

_ पर जहाँ दिल जीतने की बात आती है तो सरल और सहज होना जरुरी है,
_ नही तो मन में उतरने और मन से उतरने में ज्यादा वक्त नही लगता है..!!
चालाक इंसान कितनी भी चालाकी दिखा ले.. हमेशा मुंह की खाता है,

_ क्योंकि रंग बदलने वाले को रंग बदलने वाले ही रास आते हैं..
_ और बाद में होता ये है अपनी ही चाल में ठगा जाता है.
_ इसीलिए रिश्तों में चालाकी मत दिखाओ..
_ अगर दिखाओगे… आजीवन किसी सही इंसान के साथ टिक ही नहीं पाओगे..!!
**चालाकी करी तो नहीं.. चालाकी झेलने की ताकत भी नहीं रही.!!

— कभी-कभी इंसान के भीतर इतनी सच्चाई और सरलता होती है कि वह चालाकी करना तो दूर, उसे सहन करने की शक्ति भी खो देता है.
_ यह कमजोरी नहीं, बल्कि आत्मा की थकान है—जहाँ दिल अब बस पारदर्शिता और सच्चाई चाहता है.
_ यह एहसास याद दिलाता है कि हमें अपनी जगह वहीं तलाशनी चाहिए, जहाँ चालाकी नहीं, बल्कि सच्चे मन का साथ हो.!!
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