सुविचार – कलाकार – Artist – 212
_ कई बार रिश्तेदारों से भी ज्यादा अपना.!!
- Shailendra Sudharma
जो चट्टानों से ही न उलझे वो झरना किस काम का.
_ अकल का बोझ उठा नहीं सकता !!
तू चाहे तो फिर बहार आये.
फिर से तू मुझको खिला दे.
फिर से तू जीवन मस्त बना दे.
_ की उदास होने का वक़्त ही ना मिले..
सभी राज़ नहीं होते बताने वाले.
कभी पास आकर देखो हमें.
कैसे रोते हैं दूसरों को हंसाने वाले.
रिश्ता बनाया है तो निभाएंगे.
हर पल सबको यों ही हंसाएंगे.
_ आसानी से नहीं मिले हो तुम, वक़्त काफी लगा कर पाया है तुम्हे.!!
कौन- सी राह चलूँगा, चुनाव कर लूँगा.
मुसाफ़िर हूँ, मै भीड़ का हिस्सा नहीं.
खुली फ़िजा में, हवाओं में साँस भर लूँगा.
इस दौरान मुझे कई कटु अनुभव हुए.
इन्ही संघर्षों ने मुझे बहुत कुछ सीखाया.
जिससे मेरे जीवन को नया आकार मिला.
कुछ सीखूँ, समझूँ और जब लौट कर घर आऊँ
तो हर सीखी हुई बात को अपने जीवन में उतारूँ.
शर्त सिर्फ यह है कि बदलाव बुरा नहीं होना चाहिए.