सुविचार 4288
” उपलब्धि, कल्पना की कोख से ही जन्म लेती है “
शाम आती है तो, ढ़ल जाने को जी चाहता है.
हमने बारिश में भी जलते हुए मकान देखे हैं.!!
दर्द लिखता हुँ किसी को देता तो नही..!
वो इंसान एक दिन दुनिया पर राज करेगा..
दूसरा कोई जिम्मेदार नहीं होता”
खुशी का रहस्य है अपने आशीर्वादों को गिनना जबकि दूसरे अपनी परेशानी बढ़ा रहे हैं.
*और..**सफलता के बाद* *किसी को आमंत्रित* *नहीं करना पड़ता..!*