मस्त विचार 4087
कुछ भी नहीं तो शुक्र-ए-खुदा सीख जाओगे “…
कुछ भी नहीं तो शुक्र-ए-खुदा सीख जाओगे “…
_ जिंदगी को एक खेल की तरह खेलें, जीतने या हारने के लिए नहीं.
_ धूल चेहरे पर थी ..और हम आईना साफ करते रहे..
_क्या पता था ..रहनें कों पत्थर ही आएगें.
_ अगर यात्रा में सामान और जिंदगी से ख्वाहिशें अधिक हों तो..
_मगर इतनी देर से कि उनके होने का कोई अर्थ नहीं होता…!
_ कुछ तुम बदलकर देखो कुछ हम बदलकर देखें.
_ जो रब आपको दोगुना करके वापिस देता है.
_आज फिर तुमको…. मेरे ऐब दिखाई देंगे ..!!
We see others’ faults but why not ours ?
_ जो भी हैं वो भी उलझन में हैं,
उनके मन के आगे पेट खड़ा है..!!