सुविचार – 4112
Quotes by Thomas Hardy
कभी-कभी मैं यह जानने से कतराता हूं कि मैंने आपके लिए क्या महसूस किया है, और कभी-कभी मैं व्यथित होता हूं कि यह सब आप कभी नहीं जान पाएंगे.
आजकल हर कोई इतना प्रतिभाशाली है कि मैं केवल उन लोगों को सम्मान देना चाहता हूं जो वास्तविक सम्मान के पात्र हैं और जो गुमनामी में रहते हैं.
हमारी आंखें जो कुछ भी सामने लाती हैं, हम उसे अपने अंदर की चाहत के अनुसार रंगते और ढालते हैं.
मैं अपने विश्वास पर सवाल उठाना चाहता हूं, ताकि मेरे सवाल उठाने के बाद जो बचे वह और भी मजबूत हो.
मुझे पृथ्वी का कम आनंद लेने दीजिए, क्योंकि जिस सर्वव्यापी प्रकाश ने इसकी सुंदरता को आकार दिया है, उसके मेरे आनंद के अलावा अन्य उद्देश्य भी हैं.
संगीत और खाने के बीच एक तरह का मैत्रीपूर्ण संबंध है.
सौंदर्य उस चीज़ में नहीं है, बल्कि उस चीज़ में है जिसका वह प्रतीक है.
यदि बेहतरी की ओर कोई रास्ता है, तो उसकी शुरुआत सबसे खराब स्थिति पर पूर्ण नजर डालने से होती है.
समय सब कुछ बदल देता है सिवाय हमारे भीतर की किसी चीज़ को छोड़कर जिसके परिवर्तन से हमें हमेशा आश्चर्य होता है.
जीवन का माप उसकी वास्तविक लंबाई के बजाय अनुभव की तीव्रता के अनुपात में होना चाहिए.
अपनी तरफ़ से तैयार हो जाना ही हमेशा पूरी तैयारी नहीं होती है,
_हो सकता है हम रेगिस्तान के लिए नाव बनाने कि तैयारी कर रहे हों.
लोग शादी करना जारी रखते हैं क्योंकि वे प्राकृतिक शक्तियों का विरोध नहीं कर सकते हैं,
हालांकि उनमें से कई अच्छी तरह से जानते होंगे कि वे संभवतः जीवन की असुविधा के साथ एक महीने की खुशी खरीद रहे हैं.
मस्त विचार 3986
_ गम ये है जिसको वक़्त दिया उसने ही साथ न दिया..
सुविचार 4111
_क्योंकि आप हालात बदलने का दम रखते हैं.
मस्त विचार 3985
_उसके पहले हमारी कोई औक़ात नहीं होती..!!
सुविचार 4110
_लोग “कटी” “पतंग” को जमकर “लूटा” करते हैं,..।।
_उतने ही दूसरों की आंखों में खटकते जाते हैं..!!
Collection of Thought 983
सफलता और खुशी की शुरुआत अपने लक्ष्यों की दिशा में कदम उठाने से होती है.
यदि हम अपने ध्यान भटकाने वाली चीजों से खुद को अलग करने के लिए कदम नहीं उठाते हैं, तो अंततः वे हमें हमारे लक्ष्यों और उस जीवन से अलग कर देंगे जो हम चाहते हैं.
मस्त विचार 3984
_ “और दस्तूर देखिए जितने मिले, गिरगिट ही मिले !!
_ कुछ रंग बदलते गए तो कुछ रंग भरते गए.!!
सुविचार 4109
_मगर “अनुभव”…आज भी “उम्र” का “इंतज़ार” करता है..




