मस्त विचार 3893
_ मैं नये सिरे से जीना सिखना चाहता हूं.
_ मैं नये सिरे से जीना सिखना चाहता हूं.
_ तो आप अपने कीमती संबंधों को, खोना शुरू कर देते हैं.
_ ये कुछ छोटे संवाद, उम्मीद होते हैं कि हमारा वजूद बरकरार है.
काफ़िर हूँ मैं… कोई दीवाना नही जो लौट के फिर आऊँगा.
_ लोग समझने लगे मुझे तकलीफ नहीं होती..
कहीं न कहीं सारे लोग उलझे हुए हैं, या फिर किसी का दिल टूटा है, किसी के साथ कुछ हो गया _ जिससे परेशान है, वगैरह -वगैरह..!!
_ और उनके पास कोई सुनने या समझने वाला भी नहीं होता..!!
_ क्योंकि बोझ बन जाने से याद बन जाना बेहतर है..
*प्रेम करो, किन्तु स्वयं को आघात न लगने दो…..*
*विश्वास करो, किन्तु मुर्ख मत बनो…..*
*दूसरों की सुनो, किन्तु अपनी वाणी लुप्त न होने दो…..*
_ और जिसने संदेह कर लिया वह विश्वास करेगा नहीं.!!
_ वह मेहनत करने वालों पर फिदा हो जाती है.
_ और हालात बदलते ही लोगों के अंदाज बदलते देखे हैं.
_ जैसा होना होता है, वैसे हालात बन जाते हैं..!!