सुविचार 4161
“सफलता” की “खुशी” का “अनुभव” वही करता है,
_ जो “दिमाग” से “हार” के “डर” को निकाल देता है..
_ जो “दिमाग” से “हार” के “डर” को निकाल देता है..
_ चलो अच्छा हुआ अब कोई खतरा नहीं..
_वरना उसको.. आपसे ज़्यादा अपनी जरूरतों से मतलब रहने लगेगा..!!
_ मैंने भी रूठना छोड़ दिया, अकेला हो जाने के डर से..
_ अनुभव ही जीवन में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है !!”
_ सदा “बहार होती तो ” तिनके कहाँ से लाते…”
_ अब ऐसा रंग लगाओ, जो चढ़े तो कभी ना उतरे..
_ वो लोग सारा दोष हालातों पर ही डाल देते हैं.
_ उनसे बहुत अधिक उम्मीद करने के लिए खुद को दोष दें.
_ और आपने रखा ..मुझसे फूटा तो ..देख के नहीं रखते..!!