मस्त विचार 4794
उठा कर आँख किसी को देखता नहीं,
झुकी नज़रों से मैं_ सब समझता रहता हूँ..
झुकी नज़रों से मैं_ सब समझता रहता हूँ..
अपने हाथ ले लें,_ तो आप अपने भीतर आनंद का रसायन पैदा कर सकते हैं.
और मन में लगने वाली चोट..संभल कर जीना सिखाती है…
बुझ जाऊँगा किसी रोज़, सुलगते सुलगते…।
हमेशा नैतिकता से बात करें _ क्योंकि इंसान पर ज्यादातर मुसीबतें उसकी जुबान की वजह से आती हैं.
साँसों का भी कोई हिसाब रखता है क्या !!
और वर्तमान मैं तटस्थ रहना जीवन की श्रेष्ठ कला है !!!
बल्कि ज्यादातर चिंता, निराशा, भय और असंतोष के कारण होती है.
आप भी कभी मुझे अपनाते तो अच्छा लगता !!