मस्त विचार 3841
उसी महफ़िल से मैं रोता हुआ आया हूँ ऐ ‘यारो’,
इशारे में जहाँ लाखों मुक़द्दर बदले जाते हैं..
इशारे में जहाँ लाखों मुक़द्दर बदले जाते हैं..
_ कुछ जबरदस्त, तो कुछ जबरदस्ती रो रहें होंगे..
_ फ़िर भी मैं रोज़ तेरी राह क्यूँ तकता हूँ.
_ सवाल यह नहीं कि उस ने क्या कमाया और उस की ट्रेनिंग किस प्रकार हुई है, बल्कि यह कि वह क्या है और क्या कर सकने की सामर्थ्य रखता है.!!
_मैंने कितने आँसू बहाएं हैं तुम्हारे लिए…
जीवन में सफलता अच्छा हाथ पकड़ने से नहीं, बल्कि किसी गरीब का हाथ पकड़ने से मिलती है.
_ पर कहीं न कहीं उंगली उठ जाती है अपनों पर..