मस्त विचार 4809
“चाक़ पर हैं या फिर कसौटी पर कसे हुए हैं,
वक़्त बतायेगा की सोना थे या फ़क़त मिट्टी थे हम.”
वक़्त बतायेगा की सोना थे या फ़क़त मिट्टी थे हम.”
काँच टूटता है तो कुछ टुकड़े समेटने में नहीं आते ..!!
और जो इंसान _ यह हुनर सीख जाता है _ वो कभी भी दुखी नहीं होता.
लोगों को अपनी योजना न बताएं, _ उन्हें अपने परिणाम दिखाएं..
तो मैं क्यूँ एक असफलता के बाद सपनों का दामन छोड़ दूँ,,!!!
_ इसे जबरदस्त तरीके से तय करें..
अब किसी का भी होना नहीं चाहिए.
इंसान को जिंदगी में कभी हारने नहीं देता.
मेरा दिखना भी गवारा नहीं और नज़र भी मुझ पर ही रखते हैं..