सुविचार 4920
जब तलाश खुशियों की होगी तो _ कहीं ना कहीं से, _ ख़ुशी मिल ही जाएगी.
जब मैं समंदर नहीं देख पाता, आसमान को देखने लगता हूँ…
_ वो एक भूल _ और कर रहा है.
झुकी नज़रों से मैं_ सब समझता रहता हूँ..
अपने हाथ ले लें,_ तो आप अपने भीतर आनंद का रसायन पैदा कर सकते हैं.
और मन में लगने वाली चोट..संभल कर जीना सिखाती है…
बुझ जाऊँगा किसी रोज़, सुलगते सुलगते…।
हमेशा नैतिकता से बात करें _ क्योंकि इंसान पर ज्यादातर मुसीबतें उसकी जुबान की वजह से आती हैं.
साँसों का भी कोई हिसाब रखता है क्या !!