मस्त विचार 4710
ये जो मुस्कान है ना मेरे चेहरे पे..
ये हुनर है मेरा, हक़ीक़त नहीं…
ये हुनर है मेरा, हक़ीक़त नहीं…
जो दूसरा करे, तो चुभते हैं, परन्तु स्वयं करें तो एहसास तक नहीं होता..
उसके पहले हमारी कोई औक़ात नहीं होती..!!
*मगर…लहरों को…सुकून क्यूँ नहीं_____*
किसी की कहानी में शायद मैं भी गलत हूँ….
इसलिए सफर जारी रखिए..!!
बज तो रहा है मगर ….फिर भी बेआवाज़ है….
इसके बीच में मैं जितना हो सके स्वयं को व्यस्त रखता हूं.”
” अतीत को केवल इसलिए मिटाने की कोशिश नहीं की जा सकती है और नहीं करना चाहिए क्योंकि यह वर्तमान के अनुकूल नहीं है “