मस्त विचार 3397
कोई चाहे कितने भी दांव पेंच खेल ले, _
_ आखिर में हुकुम का इक्का……. कुदरत ही फेंकती है….
_ आखिर में हुकुम का इक्का……. कुदरत ही फेंकती है….
_ दूसरे शब्दों में कहें तो आप स्वयं ही अपने लिए आदर अर्जित करते हैं.
_ नाविक की धैर्य परीछा क्या, जब धारा ही प्रतिकूल न हो !!!
जिनके साथ अपना अधिकाधिक समय व्यतीत करते हैं.
_ जिस का काम बोझा सर पे हो,