सुविचार 3465
जो बदला जा सके उसे बदलो, जो बदला न जा सके उसे स्वीकारो_
_ और जो स्वीकारा न जा सके, उससे दूर हो जाओ ; लेकिन स्वयं को खुश रखो..
_ और जो स्वीकारा न जा सके, उससे दूर हो जाओ ; लेकिन स्वयं को खुश रखो..
परिन्दें पेट भरके दाने छत पर छोड़ जाते हैं…
_पर सवाल यह है कि ” सुख को ताला किसने लगाया है ” ???
_ इसलिए सच्चे व्यक्ति को गलत समझा जाता है.
_ क्या पता कल वो दिन हो, जिसका आपको बेसब्री से इंतजार था ..
_ कब जीत जाओ पता भी ना चले..
लेकिन कोई है जिसके पास आपसे ज्यादा मुश्किलें हैं ..
दुनिया अभी भी अच्छे और दयालु लोगों से भरी है, _ यदि आपको एक नहीं मिल रहा है, तो एक बनें..