मस्त विचार 3336
अक्सर औकात यह महसूस किया है मैंने,
उम्र- भर जी के भी जीना नहीं आया मुझको….
उम्र- भर जी के भी जीना नहीं आया मुझको….
और बुरी बातें कोई नहीं भूलता.
मैं शब्द नहीं, सत्य का बीज बिखेरता हूं,
यही मेरी झोली में है.
सबसे आसान काम है सब से खुश रहना.
मगर जीवन बुरा कदापि नहीं हो सकता.
“मैं खुद को और कितना बदल सकता हूँ ताकि मेरा काम अधिक प्रभावी हो जाए ?”
फिर भी कल के लिए परेशान हैं हम…