मस्त विचार 3302

कभी ज़िन्दगी में ख़ुशियाँ मिलें तो चख लेना मिठाई समझ कर

_ और ग़म मिलें तो खा लेना दवाई समझ कर.

सुविचार 3426

समानुभूति यानी किसी और की भावनाओं को स्वाभाविक रूप से समझना,

कि वह क्या महसूस कर रहा है, उन्होंने आपमें क्या भाव जगाए हैं.

Collection of Thought 848

Want to find happiness in your life? Appreciate the small stuff. You are blessed more than you realize.

अपने जीवन में खुशियाँ पाना चाहते हैं ? छोटी चीजों की सराहना करें, _ आप जितना महसूस करते हैं उससे कहीं अधिक आप धन्य हैं.

सुविचार 3425

“स्वीकार्यता” क्रमिक- विकास की सूचक है, हमारी तैयारी या मनोभाव यह होना चाहिए कि

चाहे जो भी हो, मैं उसका सामना करने के लिए तैयार हूँ.

मस्त विचार 3299

जब तक आप दिमाग से मजबूत नहीं बनोगे, _ आप को सही गलत की समझ नहीं होगी.
तन की नहीं, दिमाग की स्वच्छता जीवन को सुगंधित करती है.

सुविचार 3424

सुख का लालच ही नए दुख को जन्म देता है.

लालसा और लालच में अंतर समझ लिया जाए ;

लालसा का अर्थ है- ‘कुछ चाहिए’ और लालच का आशय है- जो चाहिए था वह मिल गया, ‘और चाहिए’.

आम तौर पर लालसा पूरी करने के लिए मेहनत करनी पड़ती है, तब पूरी होती है, _वहीं पर लालच का संबंध बिना मेहनत के कुछ हासिल करने से होता है यद्यपि इनके भी अपवाद होते हैं

मनुष्य में लालसा का होना स्वाभाविक है, यह प्रेरक तत्व है लेकिन लालच करना हर दृष्टि से घातक है. _इसके परिणाम दुखदायी होते हैं.

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